
महिला अधिकार: कॉमरेड ऊषा शर्मा की 5वीं पुण्यतिथि पर भागलपुर में एक खास आयोजन किया गया। भाकपा (माले) और ऐक्टू ने इस मौके पर एक व्याख्यानमाला आयोजित कर महिलाओं पर बढ़ते हमलों और उनकी चुनौतियों पर खुलकर बात की। इस दौरान मोदी सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए, जिसमें महिला आरक्षण बिल को लागू न करने और श्रम कानूनों में बदलाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
महिला अधिकार पर मंथन: कॉमरेड ऊषा शर्मा के संघर्षों को किया याद
भागलपुर के स्थानीय सुरखीकल स्थित यूनियन कार्यालय में गुरुवार को आयोजित यह व्याख्यानमाला महिला आंदोलन की जुझारू नेत्री कॉमरेड ऊषा शर्मा की 5वीं स्मृति दिवस को समर्पित थी। कार्यक्रम की शुरुआत उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित करने और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने से हुई। ‘कॉमरेड ऊषा शर्मा अमर रहे’, ‘कॉमरेड तुम्हारे सपनों को मंजिल तक पहुंचाएंगे’, ‘महिला आरक्षण लागू करो’ और ‘महिला अधिकारों पर हमला बंद करो’ जैसे नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के सुरक्षा, सम्मान और महिला अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए कॉमरेड ऊषा शर्मा के जीवन संघर्ष की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में महिलाओं पर हमले तेजी से बढ़े हैं। मोदी सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। यह सरकार महिलाओं पर जुल्म और अत्याचार करने वालों को संरक्षण देती है, साथ ही लेबर कोड के जरिए कामकाजी महिलाओं की कानूनी सुरक्षा को भी खत्म कर दिया गया है।
महिला आरक्षण बिल और सरकार की नीयत पर सवाल
भाकपा (माले) के जिला सचिव महेश प्रसाद यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2023 में महिला आरक्षण बिल पास होने के बावजूद मोदी सरकार इसे लागू नहीं कर रही है और विपक्ष पर झूठे आरोप लगाकर नौटंकी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक महिला विरोधी पीएम मोदी और उनकी सांप्रदायिक पार्टी भाजपा है। भाकपा (माले) की मांग है कि सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू किया जाए।
महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा: बड़ी चुनौतियां
ऐपवा की जिला सचिव रेणु देवी ने महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए उन्नत और वैज्ञानिक शिक्षा एक बड़ी चुनौती है। इसके अभाव में उन्हें अंधविश्वास और धार्मिक कर्मकांडों के गहरे कुएं में धकेला जा रहा है। चुनावी ध्रुवीकरण के लिए धर्मांधता को बढ़ावा दिया जा रहा है। व्याख्यानमाला को भाकपा (माले) के पूर्व जिला सचिव बिंदेश्वरी मंडल, कहलगांव प्रखंड सचिव रणधीर यादव, ऐक्टू के जिला उपाध्यक्ष अरुणाभ शेखर, जिला कमिटी सदस्य पुरुषोत्तम दास और सिकन्दर तांती सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम में भाकपा (माले) के जिला कमिटी सदस्य फागुन मंडल संथालजी, आशुतोष यादव, खरीक प्रखंड सचिव सत्यनारायण यादव, नगर कमिटी सदस्य मनोज कृष्ण सहाय, अमर कुमार, बुधनी उरांव, पूनम देवी, लूटन तांती व अमित गुप्ता, करण कुमार, कविता देवी, मीरा देवी, बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन की चंदा देवी, प्रेमलता देवी, किरण देवी, असंगठित कामगार महासंघ की गौरी देवी, पार्वती देवी, सूरज कुमार और मृत्युंजय कुमार जैसे कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।







