Bihar Mithila University: सांसद संजय झा ने मिथिला के लिए एक बड़े सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बीते 24 जुलाई को राज्यसभा में ‘मिथिला केंद्रीय विश्वविद्यालय विधेयक, 2026’ सूचीबद्ध हुआ, जिसका सीधा संबंध Bihar के दरभंगा और पूरे मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से है। यह विधेयक मिथिला में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन संसदीय गतिरोध के कारण इसे सदन में पेश नहीं किया जा सका।








मिथिला की संस्कृति और भाषा को मिलेगी नई पहचान
जेडीयू के शीर्ष नेता संजय कुमार झा ने बताया कि इस महत्वपूर्ण विधेयक का मुख्य उद्देश्य मिथिला की समृद्ध संस्कृति, उसकी विरासत, मैथिली भाषा और तिरहुता (मिथिलाक्षर) लिपि को संरक्षित करना है। यह विधेयक भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, कला और ऐतिहासिक साहित्य के उन्नत अध्ययन एवं शोध के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित करने की परिकल्पना करता है। दरभंगा में प्रस्तावित यह Bihar Mithila University क्षेत्र की बौद्धिक क्षमता को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का माध्यम बनेगा।
संसदीय गतिरोध से अटका महत्वपूर्ण विधेयक
संजय झा ने खेद व्यक्त किया कि राज्यसभा में बीते 24 जुलाई को उनका निजी सदस्य विधेयक सूचीबद्ध होने के बावजूद, संसद में जारी गतिरोध के कारण इसे सदन में प्रस्तुत नहीं किया जा सका। यह विधेयक, ‘मिथिला केंद्रीय विश्वविद्यालय विधेयक, 2026’, क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद जगाता है।

मुझे विश्वास है, यदि इस विधेयक को सदन की मंजूरी मिलती है, तो यह संस्थागत पहल मिथिला की समृद्ध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस विधेयक के पारित होने से दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र में शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। यह देखना होगा कि अगले सत्रों में यह विधेयक कब सदन के पटल पर रखा जाता है और मिथिला के इस बड़े सपने को कब साकार किया जा सकेगा।









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