
Benipur Murder Case: कानून के हाथ लंबे होते हैं और इंसाफ की चक्की भले ही धीमी चलती है, लेकिन पीसती बहुत बारीक है। बेनीपुर की अदालत में जब इंसाफ का हथौड़ा चला तो एक साथ 6 लोगों की जिंदगी सलाखों के पीछे कैद हो गई।
Benipur Murder Case में अदालत का ऐतिहासिक फैसला
Benipur Murder Case में सोमवार सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद आज अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माधवेंद्र सिंह की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हत्या के इस मामले में 6 अभियुक्तों को आजीवन कारावास और बीस-बीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोषियों में महारुद्र झा, दिलीप झा, सुधीर झा, राघव झा, कन्हैया झा एवं कुंदन झा शामिल हैं।
अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर दोषियों को छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं, इस मामले में एक अन्य अभियुक्त चंद्र नारायण झा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या था पूरा मामला जिसने इलाके में मचा दी थी सनसनी
यह मामला बहेड़ा थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 3 का है। सूचक अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी के अनुसार, 28 नवंबर 2021 को एक भूमि विवाद को लेकर अभियुक्तों ने मिलकर घनश्याम झा पर जानलेवा हमला कर दिया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। इस जघन्य अपराध के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। मृतक के पुत्र रमण कुमार झा के बयान पर बहेड़ा थाने में कांड संख्या 286/21 दर्ज की गई थी, जिसमें कुल सात लोगों को अभियुक्त बनाया गया था।
पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद 10 मई 2022 को आरोप गठन करते हुए सुनवाई प्रारंभ की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 साक्षियों के बयान दर्ज कराए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सोमवार को छह अभियुक्तों को दोषी करार दिया था और सजा पर फैसले के लिए आज की तारीख मुकर्रर की थी।
इन धाराओं के तहत मिली सजा
अपर लोक अभियोजक श्रीमती पूनम झा ने जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने अभियुक्तों को अलग-अलग धाराओं में दोषी पाया है। उन्होंने अभियुक्तों के लिए कठोरतम सजा की मांग की थी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। दोषियों को मिली सजा का विवरण इस प्रकार है:
- धारा 302/149: आजीवन कारावास और ₹20,000 का अर्थदंड।
- धारा 307/149: 7 वर्ष की सजा और ₹5,000 का अर्थदंड।
- धारा 148: 2 साल की सजा और ₹2,000 का जुर्माना।
- धारा 323: 6 माह की सजा और ₹500 का अर्थदंड।
- धारा 341: ₹300 का अर्थदंड।
अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने कम से कम सजा देने की अपील की, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ने यह फैसला सुनाया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस फैसले के बाद न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






