Bihar Lok Sahitya: दरभंगा में आज आयोजित ‘प्री-लोक मंथन–2026’ ने मिथिला के समृद्ध लोक साहित्य के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र के सभागार में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य को बचाना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना था। अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास ने इस कार्यक्रम के माध्यम से गंभीर संवाद की एक नई परंपरा शुरू की है।
मिथिला की अमूल्य विरासत बचाने को बड़ी पहल, दरभंगा में साहित्य परिषद ने छेड़ी मुहिम!
Bihar Folk Literature: भारतीय भाषाओं के समृद्ध लोक साहित्य के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। दरभंगा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास द्वारा आयोजित ‘प्री-लोक मंथन–2026 (हम भारत के लोग)’ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 12 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र के सभागार में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य को बचाना, बढ़ावा देना और उसका संकलन करना था। इस विशेष कार्यक्रम का केंद्रबिंदु मिथिला के गौरवशाली लोक साहित्य को बनाया गया।







यह आयोजन दो महत्वपूर्ण सत्रों में बांटा गया था। पहले सत्र में लोक साहित्य के विभिन्न आयामों पर गहन बौद्धिक विमर्श हुआ, जहाँ विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। वहीं, दूसरे सत्र में मिथिला की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हुए मनोहारी लोकगीत, काव्य पाठ और लोक साहित्य की प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिसने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मिथिला की सांस्कृतिक विरासत बचाने की मुहिम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर नेपाल से श्री कमला पुत्र विक्रम जी शामिल हुए, जबकि फुलहर से श्री सिया प्यारे शरण (संदीप जी) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान परिषद ने स्पष्ट किया कि Bihar Folk Literature को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बिहार की सचिव एवं केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य (लोक साहित्य) डॉ. मीनाक्षी मीनल ने अपने संबोधन में कहा, ‘परिषद भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं नई पीढ़ी तक उसके संवहन के लिए सतत कार्य कर रही है।’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘प्री-लोक मंथन–2026’ से प्राप्त विचार और निष्कर्ष आगामी ‘लोक मंथन–2026’ को और अधिक समृद्ध व सार्थक बनाएंगे।
लोक कलाकारों ने मोहा मन, साहित्यकारों की रही मौजूदगी
सांस्कृतिक सत्र में मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लोक गायिका अनीता कुमारी ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। उनके साथ लोक संरक्षक श्री सुनील कुमार, कवयित्री श्रीमती नैना साहू, कवि स्वतंत्र शांडिल्य और आनंद मिश्रा जैसे कई कलाकारों ने भी अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्री गौतम कुमार वात्स्यायन ने किया, जिन्होंने पूरे आयोजन को गरिमामय बनाए रखा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कवियों, लोक कलाकारों, शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों की उपस्थिति रही, जो लोक साहित्य के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।
यह आयोजन मिथिला के लोक साहित्य की महत्ता को रेखांकित करता है और इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देता है। भविष्य में होने वाले ‘लोक मंथन–2026’ के लिए यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित होगा, जिससे भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती मिलेगी।
मिथिला की सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर विमर्श
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में नेपाल से आए मुख्य अतिथि श्री कमला पुत्र विक्रम जी और फुलहर के विशिष्ट अतिथि श्री सिया प्यारे शरण (संदीप जी) मौजूद रहे। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। दो सत्रों में बंटे इस आयोजन के पहले सत्र में लोक साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर गहन बौद्धिक विमर्श किया गया, जिससे Bihar Lok Sahitya के भविष्य पर उपयोगी चर्चा हुई।
लोकगीतों और कविताओं से सजी शाम
कार्यक्रम का दूसरा सत्र सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भरा रहा, जिसमें मिथिला की लोक-सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लोक गायिका अनीता कुमारी ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक संरक्षक श्री सुनील कुमार, कवयित्री श्रीमती नैना साहू, कवि स्वतंत्र शांडिल्य और आनंद मिश्रा सहित दर्जनों कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इस पूरे आयोजन का प्रभावी संचालन श्री गौतम कुमार वात्स्यायन ने किया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बिहार की सचिव और केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य (लोक साहित्य) डॉ. मीनाक्षी मीनल ने इस अवसर पर कहा, “परिषद भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं नई पीढ़ी तक उसके संवहन के लिए सतत कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्री-लोक मंथन–2026 के माध्यम से प्राप्त विचार एवं निष्कर्ष आगामी लोक मंथन–2026 को और अधिक समृद्ध एवं सार्थक बनाएंगे।”
इस आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्यकार, कवि, लोक कलाकार, शोधार्थी और साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की इस मुहिम को अपना समर्थन दिया। यह कार्यक्रम आगामी ‘लोक मंथन–2026’ के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगा, जिससे भारतीय लोक साहित्य को नई पहचान मिल सकेगी।









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