Bihar PhD Admission: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) में पीएचडी नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से ठप हो गई है। पैट-2024 परीक्षा का परिणाम घोषित हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन 831 सफल छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक काउंसलिंग और साक्षात्कार को लेकर कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे छात्रों में निराशा बढ़ रही है।
बिहार में PhD नामांकन क्यों रुका?
इस अप्रत्याशित देरी के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम और दूसरा, बिहार लोकभवन से जारी एक महत्वपूर्ण पत्र। आठ मई को पीएचडी प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया था, लेकिन इसके बाद से ही आगे की प्रक्रिया रुक गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब आगे के मार्गदर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।






कुलाधिपति सचिवालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने दो जून को एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि सूबे के किसी भी विश्वविद्यालय को शैक्षणिक सत्र 2024 और 2025 के लिए पीएचडी एडमिशन टेस्ट आयोजित करने या कोई नया विज्ञापन निकालने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
इस आदेश के बाद ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया पर विराम लग गया है। यह फैसला यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों के मद्देनजर लिया गया है।
831 छात्रों के भविष्य पर संकट
पैट-2024 उत्तीर्ण करने वाले 831 छात्रों को उम्मीद थी कि परिणाम के बाद जल्द ही उन्हें पीएचडी में नामांकन का अवसर मिलेगा। लेकिन कुलाधिपति सचिवालय के इस पत्र ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब इन छात्रों को नहीं पता कि उनकी काउंसलिंग और साक्षात्कार कब होंगे या यह प्रक्रिया फिर से कब शुरू होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संबंध में कोई भी कदम उठाने से पहले राज्य सरकार और कुलाधिपति सचिवालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने तक इंतजार करने का फैसला किया है। छात्रों और शोधार्थियों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इससे उनके अकादमिक करियर पर सीधा असर पड़ रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन और सफल छात्र दोनों ही बिहार सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। यह देखना होगा कि सरकार और यूजीसी इस गतिरोध को दूर करने के लिए क्या समाधान निकालते हैं, ताकि 831 छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके और शैक्षणिक सत्र 2024 और 2025 के लिए पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।








