Biroul Court News: बिरौल अनुमंडल की 15 लाख आबादी के लिए बड़ी खुशखबरी है। यहां मद्य निषेध न्यायालय की स्थापना का रास्ता अब साफ होता दिख रहा है। लंबे समय से चल रही मांग पर विभाग ने सकारात्मक कदम उठाया है, जिससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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बिरौल में क्यों जरूरी था मद्य निषेध न्यायालय?
बिरौल अनुमंडल की स्थापना 35 साल पहले हुई थी, जिसकी आबादी लगभग 15 लाख है और इसमें 83 पंचायतें एवं 303 राजस्व ग्राम शामिल हैं। वर्तमान में, बिरौल के 6 प्रखंडों से जुड़े मद्य निषेध अधिनियम के मामलों की सुनवाई दरभंगा व्यवहार न्यायालय में होती है। बिरौल से दरभंगा की दूरी करीब 100 किलोमीटर है, जिससे आम जनता को आने-जाने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। इस लंबी दूरी के कारण लोगों को आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है, साथ ही न्याय पाने में भी देरी होती है।
अधिवक्ता की पहल ने दी रफ्तार
बार एसोसिएशन, बिरौल के पूर्व सचिव और अधिवक्ता कैलाश कुमार ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने 18 मई को विभागीय मंत्री मदन सहनी को पत्र लिखकर बिरौल में मद्य निषेध न्यायालय की स्थापना की त्वरित कार्रवाई की मांग की थी। उनके पत्र में बताया गया कि बिरौल में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस भवन और मद्य निषेध थाना पहले से ही कार्यरत है, ऐसे में यहां न्यायालय की स्थापना से लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय मिल सकेगा। अधिवक्ता के आवेदन पर संज्ञान लेते हुए, संयुक्त आयुक्त मद्य निषेध कृष्ण कुमार ने 27 मई को विशेष सचिव-सह-अपर विधि परामर्शी, विधि विभाग को पत्रांक भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया।
Biroul Court News: 15 लाख लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
विधि विभाग की मंजूरी के बाद बिरौल में मद्य निषेध न्यायालय की स्थापना से अनुमंडल के 6 प्रखंडों के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें अब अपने मामलों की सुनवाई के लिए लंबी और महंगी यात्रा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह कदम स्थानीय लोगों के लिए न्याय प्रक्रिया को अधिक सुलभ और तीव्र बनाएगा, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा।
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