Darbhanga Cemetery Arson: आंचल कुमारी दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में कब्रिस्तान की भूमि में आग लगाए जाने की घटना ने स्थानीय मुस्लिम समाज में चिंता बढ़ा दी है। यह चौथी बार है जब कब्रिस्तान को निशाना बनाया गया है। कमतौल थाना में इस मामले को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसमें एक व्यक्ति को नामजद आरोपी बनाया गया है। इस घटना ने क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया है, और निष्पक्ष जांच तथा सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
कमतौल थाना क्षेत्र के ढढ़ियां बेलबाड़ा पंचायत के रमौल गांव स्थित कब्रिस्तान में 16 अक्टूबर 2026 को अपराह्न डेढ़ बजे आग लगा दी गई। रमौल गांव के निवासी मो0 अब्दुल बदूद (64) ने इस घटना के संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि आग बगल के करवा तरियानी पंचायत के पनिहारा गांव निवासी दुलार पासवान के पुत्र शीतल पासवान ने लगाई थी।
मो0 अब्दुल बदूद ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कब्रिस्तान में आगजनी की तीन वारदातें हो चुकी हैं, लेकिन उनके पीछे कौन था, यह कभी पता नहीं चल पाया। बार-बार इस तरह की घटनाएं होने से मुस्लिम समाज के बीच गहरा भय और चिंता व्याप्त है। लोग अपने पवित्र स्थल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
कब्रिस्तान में चौथी बार आग, समाज में आक्रोश
लगातार चौथी बार कब्रिस्तान में आग लगने की घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। रमौल गांव के लोग इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की हरकतें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं और समाज में वैमनस्यता फैलाती हैं। पुलिस को जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा कर शांति बहाल करनी चाहिए।
पुलिस जांच में क्या निकलेगा सच?
कमतौल थाना ने मो0 अब्दुल बदूद की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इस मामले की तहकीकात अ0नि0 अख्तर अंसारी कर रहे हैं। पुलिस अब शीतल पासवान और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच करेगी। समुदाय को उम्मीद है कि पुलिस इस संवेदनशील मामले में तेजी से कार्रवाई करेगी और सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मो0 अब्दुल बदूद (64) ने अपनी प्राथमिकी में उल्लेख किया है कि “पूर्व में भी इस तरह की अगलगी की घटना तीन बार हो चुकी है जिसका पता नहीं चल सका कि किसने आग लगाया है। इस तरह की घटना होने से मुस्लिम समाज के बीच भय एवं चिंता गहराने लगी है।”
स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और दोषियों को कानून के दायरे में लाए। इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब समाज में सद्भाव बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।







