Darbhanga Farmers: धान की खेती करने वाले दरभंगा के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। जिले के जाले प्रखंड स्थित सहसपुर पंचायत में कृषि विज्ञान केंद्र ने एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल से किसानों को धान उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया, जिससे उनकी पैदावार बढ़ने के साथ-साथ लागत में भी कमी आएगी। इस प्रशिक्षण में खरपतवार नियंत्रण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और एजोला उत्पादन की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
धान उत्पादन में खरपतवार नियंत्रण: पहचान और उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। कृषि अभियंत्रण विशेषज्ञ ई. निधि कुमारी ने सहसपुर पंचायत में किसानों को धान की फसल में खरपतवार की पहचान करने के तरीके बताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरपतवारों के कारण उपज में भारी हानि होती है। इसके यांत्रिक, सांस्कृतिक और रासायनिक नियंत्रण के विभिन्न उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि Darbhanga Farmers अपनी फसल को सुरक्षित रख सकें।






वैज्ञानिक जल प्रबंधन: कम पानी में अधिक उपज का मंत्र
प्रशिक्षण का एक मुख्य बिंदु वैज्ञानिक जल प्रबंधन था। किसानों को एजोला उत्पादन और अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) तकनीक के बारे में बताया गया। इस तकनीक की मदद से धान की खेती में 25 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है। पानी की बचत के साथ-साथ यह विधि खेती की लागत को कम करने और उत्पादन को बढ़ाने में भी सहायक है। किसानों को धान की विभिन्न अवस्थाओं में सिंचाई के सही प्रबंधन, पंक्तिबद्ध रोपाई में कोनो वीडर एवं पावर वीडर के उपयोग और कटाई से 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद करने की सलाह दी गई।

किसानों को मिला सीधा लाभ: लागत में कमी और बंपर पैदावार
इस ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहसपुर पंचायत के 20 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इन किसानों ने आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी उपज बढ़ा सकते हैं, बल्कि पानी और अन्य संसाधनों की बचत करके अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









