Bihar Sanskrit University: संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित करने की दिशा में पटना से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। दरभंगा स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने राजकीय संस्कृत कॉलेज में एक नए छात्रावास की आधारशिला रखी है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों में पठन-पाठन के प्रति रुचि बढ़ाना और संस्कृत भाषा एवं संस्कृति के विकास को गति देना है।
कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने इस अवसर पर कहा कि बेहतर सुविधाएँ मिलने से छात्रों का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों के हितों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने से संस्कृत के प्रति उनका जुड़ाव निश्चित रूप से बढ़ेगा। इससे कॉलेजों में छात्रों की संख्या में भी वृद्धि होगी, जो संस्कृत शिक्षा के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।






आधुनिकता और गुरुकुल परंपरा का संगम
कुलपति ने बताया कि छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस छात्रावास की अत्यंत आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पीआरओ डॉ निशिकांत ने वैदिक मंगलाचरण के बीच संपन्न हुए शिलान्यास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि यह नया छात्रावास आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा।

प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने कहा, “उक्त छात्रावास आधुनिक सुविधाओं के साथ वैदिक गुरुकुल परम्परा को भी पुनर्जीवित करेगा।”
यह पहल संस्कृत शिक्षा में गुणवत्ता और परंपरा का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करेगी।
छात्रों के लिए बढ़ेगा आकर्षण, विकास को मिलेगी गति
इस नए छात्रावास के निर्माण से राजकीय संस्कृत कॉलेज के प्रति छात्रों का आकर्षण और भी बढ़ेगा। कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्कृत और संस्कृति के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छात्रावास की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
डॉ. मनोज कुमार ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, “यह छात्रावास का निर्माण बहुत शीघ्र होगा और इसका उद्घाटन भी कुलपति प्रो पाण्डेय ही करेंगे।”
कार्यक्रम में संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश झा और वित्त पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार झा की भी विशिष्ट उपस्थिति रही, जिनका स्वागत किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पूर्व प्रभारी कुलपति सह वरिष्ठ आचार्य प्रो. उमेश शर्मा, डॉ. शशिकांत तिवारी, डॉ. विवेकानंद पासवान, डॉ. गोपाल झा, डॉ. सुजीत सौरभ सहित समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। स्थानीय वार्ड पार्षद कैलाश यादव, हथुआ ज्ञानोदय संस्कृत महाविद्यालय, मंदिरी के प्रिंसिपल डॉ. अनिल कुमार झा और बख्तियारपुर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बालमुकुंद मिश्र ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस नए छात्रावास का निर्माण बिहार में संस्कृत शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









