
फर्जी आधार कार्ड: बिहार के दरभंगा जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बिरौल पुलिस और बक्सर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जो गरीबों को निशाना बनाकर यह गोरखधंधा चला रहा था। यह मामला साइबर अपराध की गहराई और पहुंच को दर्शाता है।
बक्सर जिले में दर्ज एक साइबर अपराध की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे तकनीकी सुराग मिले, जिनके तार सीधे बिरौल से जुड़े पाए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके बाद बक्सर पुलिस ने स्थानीय बिरौल पुलिस के सहयोग से ग्यारी गांव में छापेमारी की और फूल हसन नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर बक्सर ले गई। बताया जा रहा है कि फूल हसन इस नेटवर्क का एक अहम सदस्य है। इससे पहले भी इस मामले में दो अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गैंग कैसे करता था फर्जी आधार कार्ड का खेल?
जांच में यह साफ हुआ है कि यह गिरोह फर्जी कागजात के सहारे लोगों के फर्जी आधार कार्ड में नाम, पता और जन्मतिथि जैसी अहम जानकारियों में बदलाव करता था। बदले में गरीब और जरूरतमंद लोगों से एक हजार से पांच हजार रुपये तक वसूले जाते थे। हैरानी की बात यह है कि ये फर्जी आधार कार्ड सरकारी पोर्टल पर भी दिखाई देते थे। पुलिस ने इनके पास से लैपटॉप, आइरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट मशीन, प्रिंटर और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं।
पहले भी पकड़ा गया था आरोपी, अब खुलेगी पुरानी फाइलें
वर्ष 2024 में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी उमेश कुमार भारती के निर्देश पर कोठी पुल स्थित आधार केंद्र पर छापेमारी के दौरान भी फूल हसन को हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उस समय उसे पीआर बांड पर छोड़ दिया गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अब दोबारा गिरफ्तारी के बाद, पुलिस पुराने मामलों की फाइलें भी खोल सकती है और इस पूरे रैकेट के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
पहचान पर खतरा: कैसे चलता था Fake Aadhaar Card का गोरखधंधा?
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी कागजातों का इस्तेमाल कर लोगों के आधार कार्ड में नाम, पता और जन्मतिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों में हेरफेर करता था। गरीब और जरूरतमंद लोगों से इस काम के लिए एक हजार से पांच हजार रुपये तक वसूले जाते थे। हैरानी की बात यह है कि ये फर्जी आधार कार्ड सरकारी पोर्टल पर भी दिखाई देते थे, जिससे इनकी वैधता पर सवाल खड़े हो रहे थे।
गिरफ्तारियां और बरामदगी: अब तक क्या-क्या मिला?
इस मामले में पुलिस ने कई आधुनिक उपकरण भी बरामद किए हैं। इनमें लैपटॉप, आइरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट मशीन, प्रिंटर और अन्य डिजिटल सामान शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल Fake Aadhaar Card बनाने में किया जाता था। 2024 में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी उमेश कुमार भारती के निर्देश पर कोठी पुल स्थित एक आधार केंद्र पर छापेमारी के दौरान भी फूल हसन को हिरासत में लिया गया था, लेकिन तब उसे पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था। इस बार की गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने मामलों की फाइलें भी फिर से खोली जा सकती हैं।
इस साइबर अपराध के पूरे नेटवर्क का खुलासा होना अभी बाकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे पर हमला है, जो अपनी पहचान के लिए आधार कार्ड पर निर्भर करते हैं।
पुलिस की अपील: जालसाजों से बचें
पुलिस निरीक्षक सह पर्यवेक्षी पदाधिकारी अमृत लाल वर्मन ने लोगों से अपील की है कि आधार कार्ड से संबंधित किसी भी कार्य के लिए केवल अधिकृत केंद्रों पर ही जाएं। किसी भी दलाल या बिचौलिए के चक्कर में न पड़ें, क्योंकि गलत तरीके से फर्जी आधार कार्ड बनवाना न सिर्फ अपराध है, बल्कि आपकी पहचान और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। बिरौल से उजागर हुआ यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे पर हमला है, जो आधार कार्ड को अपनी जिंदगी की डोर मानते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







