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Darbhanga News: जाले के किसानों की बल्ले-बल्ले! अब घर बैठे बढ़ाएंगे कमाई, सीख ली ये खास तकनीक

Jale Vermicompost: कृषि विज्ञान केंद्र जाले में 50 किसानों को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता घटेगी और किसान दोगुनी कमाई कर पाएंगे।

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Jale Vermicompost: बिहार के जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। यहां वर्मीकम्पोस्ट निर्माण पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। इस कार्यक्रम में मजरा और जोगियारा सहित आसपास के कई गांवों से आए 50 किसानों ने हिस्सा लिया।केंद्र के केन्द्राध्यक्ष और वरीय वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर के संरक्षण में आयोजित इस प्रशिक्षण से किसानों को केंचुआ खाद बनाने की वैज्ञानिक विधि की विस्तृत जानकारी मिली। इसका सीधा लाभ उनकी मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादन में देखने को मिलेगा, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।Darbhanga News: जाले के किसानों की बल्ले-बल्ले! अब घर बैठे बढ़ाएंगे कमाई, सीख ली ये खास तकनीक

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जैविक खाद से बढ़ेगी मिट्टी की जान, कम होगी लागत

उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने किसानों को बताया कि केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता, जल धारण क्षमता और फसल उत्पादन बढ़ाने में बहुत सहायक है। उन्होंने ट्राइकोडर्मा और पैसाइलोमाइसिस के उपयोग से मिट्टी सुधार के तरीकों पर भी प्रकाश डाला। अभियांत्रिकी वैज्ञानिक इंजी. निधि कुमारी ने किसानों को गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष, सब्जियों के छिलके और आइसीनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का उपयोग करके गड्ढा और बेड विधि से खाद तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई।इंजी. निधि कुमारी ने बताया कि इस विधि से 45-50 दिनों में उच्च गुणवत्ता वाली वर्मीकम्पोस्ट तैयार हो जाती है। यह न सिर्फ खेती की लागत को कम करती है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होती है।

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मिट्टी जांच से लेकर केंचुओं के रखरखाव तक की पूरी जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान प्रयोगशाला सहायक शशिमाला कुमारी ने किसानों को मिट्टी जांच और नमूना संग्रह की सही विधि के साथ-साथ वर्मीकम्पोस्ट निर्माण की पूरी प्रक्रिया समझाई। वहीं, प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. चन्दन कुमार ने कम लागत में वर्मीकम्पोस्ट इकाई स्थापित करने, केंचुओं का उचित रखरखाव करने, खाद की छनाई, भंडारण और खेत में इसके सही उपयोग के तरीके बताए।प्रशिक्षण के समापन पर, सभी 50 किसानों को केंचुए और वर्मीबेड उपलब्ध कराए गए। यह सुविधा उन्हें अपने खेतों में जैविक खाद तैयार करने और उपयोग करने में मदद करेगी, जिससे वे खेती में लागत कम करके अतिरिक्त आय भी कमा सकें। इस पहल से जाले के किसानों को आत्मनिर्भर बनने और टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

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