Darbhanga News देर से मगर कुशेश्वरनाथ मंदिर प्रबंधन मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) शशांक राज और उपाध्यक्ष सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) प्रभाकर तिवारी का बड़ा फैसला|पंडों को अब मिलेगा ID कार्ड! महिला श्रद्धालुओं के लिए बड़ा फैसला। अब। गर्भगृह और मंदिर परिसर में सेवा देने वाले सभी पंडों को विशिष्ट पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा।
Bihar Mandir Suraksha: बिहार के प्रसिद्ध कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर में पूजा-पाठ की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मंदिर न्यास समिति ने सभी वैध पंडों को आधिकारिक पहचान पत्र (आई कार्ड) जारी करने का फैसला किया है, जिससे उनकी जवाबदेही तय की जा सकेगी।
मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) शशांक राज और उपाध्यक्ष सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) प्रभाकर तिवारी की अध्यक्षता में पंडों के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में मंदिर की विधि-व्यवस्था, महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दर्शन-पूजन के नियमों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। पंडों से जुड़े आपसी विवाद, अनुचित आचरण और चोरी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है।
विशिष्ट पहचान पत्र से बढ़ेगी जवाबदेही और पारदर्शिता
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि गर्भगृह और मंदिर परिसर में सेवा देने वाले सभी पंडों को विशिष्ट पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा। इस पहल से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे, जिससे मंदिर की व्यवस्था में सुधार आएगा।
- स्पष्ट पहचान: आई कार्ड मिलने से मंदिर परिसर में केवल अधिकृत पंडों की ही पहचान हो सकेगी। इससे बाहरी तत्वों का अनाधिकृत प्रवेश रुकेगा, जिससे श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होगी।
- जवाबदेही का निर्धारण: किसी भी प्रकार की शिकायत, दुर्व्यवहार या विवाद की स्थिति में संबंधित पंडा की सीधी प्रशासनिक जवाबदेही तय की जा सकेगी। यह कदम पंडों के आचरण में सुधार लाने में सहायक होगा।
चरित्र सत्यापन और आयु सीमा तय करने की मांग
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों ने प्रशासन से पहचान पत्र जारी करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि सभी पंडों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन और गहन चरित्र जांच कराई जाए। इसके साथ ही, उनका स्थायी पता, आधार विवरण और पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जाए।
यह मांग 27 सितंबर को मंदिर से जुड़े एक पंडा पर 9 वर्षीय मासूम बच्ची से छेड़छाड़ के आरोप में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद और तेज हो गई है। हालांकि, दोषसिद्धि न्यायालय का विषय है, लेकिन सुरक्षा कारणों से लोगों ने पंडों की न्यूनतम आयु 30 वर्ष तय करने और सख्त आचार संहिता लागू करने की गुहार लगाई है। बैठक में बीडीओ प्रभाशंकर मिश्रा, सीओ राकेश रौशन भारती और थानाध्यक्ष गौरव प्रसाद भी उपस्थित थे। मंदिर प्रशासन का यह कदम बिहार में मंदिर सुरक्षा को लेकर एक नई मिसाल कायम करेगा।







