Bihar Flood Alert: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक हुई अत्यधिक बारिश से बिहार में गंडक नदी रौद्र रूप दिखा रही है। इस भारी जलश्राव के कारण नदी ने 2024 के अपने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे राज्य के छह जिलों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। पश्चिम चंपारण में दो महत्वपूर्ण तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे स्थानीय आबादी में चिंता बढ़ गई है।
बिहार में गंडक का भयानक रूप! चंपारण तटबंध टूटा, SP ऑफिस तक डूबा; अलर्ट जारी
Bihar Flood Alert: उत्तर बिहार में गंडक नदी की विकराल धारा ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पश्चिम चंपारण जिले के खैरटवा के पास सोमवार देर रात चंपारण तटबंध टूट गया, जिसके बाद आसपास के इलाकों में तेजी से पानी फैलने लगा। इस घटना से कई गांवों में अफरातफरी मच गई और लोग रात में ही अपना सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे।
वाल्मीकिनगर गंडक बराज से मंगलवार सुबह 8 बजे एक लाख इक्यानवे हजार दो सौ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, खैरटवा गांव में तटबंध के 4 किलोमीटर पर करीब 10 मीटर की लंबाई में एक ‘माइनर ब्रीच’ हुआ है। विभाग का कहना है कि यह पानी फिलहाल खेतों में फैल रहा है और आगे चलकर चंपारण तटबंध के 9.50 किलोमीटर पर फिर गंडक नदी में मिल जाएगा।
कई पंचायतें बाढ़ की चपेट में, आवागमन ठप
तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही खैरटवा के आसपास के गांवों में दहशत फैल गई। चखनी, राजावटिया, सिंगाड़ी पिपरिया, चंद्रपुर, रतवल और पतिलार पंचायत के कई गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटबंध पर भारी दबाव था। तटबंध टूटने के बाद रतवल-चखनी मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और तटबंध की मरम्मत की मांग की है। गौरतलब है कि पिछले साल भी इसी जगह गंडक का चंपारण तटबंध टूटा था, तब भी इलाके में भारी नुकसान हुआ था।
जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘बगहा के पास गंडक नदी का जलस्तर अब तक के उच्चतम फ्लड लेवल 90.90 मीटर से करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। हमारी टीम मौके पर मौजूद है और तटबंध की मरम्मत का कार्य शुरू करने के प्रयास जारी हैं।’
बगहा शहर में घुसा पानी, SP कार्यालय भी डूबा
गंडक का पानी बगहा शहर में भी प्रवेश कर गया है। सोमवार को शहर के नौ वार्ड बाढ़ की चपेट में आ गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बगहा SP कार्यालय, पुलिस लाइन और किसान भवन भी पानी में डूब गए। बगहा-बेतिया और बगहा-वाल्मीकिनगर सड़क पर पानी भर जाने से आवागमन बाधित है। कई जगहों पर लोग नाव के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-727, जो तटबंध से लगभग तीन किलोमीटर दूर है, पर फिलहाल बड़े पैमाने पर असर की संभावना नहीं है क्योंकि संबंधित इलाके में गंडक नदी का बहाव घट रहा है।
चार जिलों में बाढ़ का व्यापक असर
गंडक की बाढ़ का असर पश्चिम चंपारण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण जिलों में भी दिख रहा है। पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर और अरेराज के कई गांवों में पानी भर गया है। गोपालगंज में सदर प्रखंड के चार गांवों की सड़कें डूब गई हैं और दियारा इलाके के कई स्कूल भी पानी से घिर गए हैं। सारण जिले में भी बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है, जहां करीब 50 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद होने की जानकारी मिली है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण, ये चार जिले गंडक की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
गंडक बराज से भारी डिस्चार्ज, 2024 का रिकॉर्ड टूटा
जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 28 सितंबर की सुबह 6 बजे वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह आंकड़ा इस साल के अधिकतम डिस्चार्ज 5,62,500 क्यूसेक से थोड़ा कम है, लेकिन नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। विभाग ने बताया कि बराज पर 13 घंटे तक पानी का डिस्चार्ज 5 लाख क्यूसेक से अधिक रहा, वहीं करीब 32 घंटे तक यह 4 लाख क्यूसेक से ज्यादा बना रहा।
गंडक नदी का नया रिकॉर्ड बगहा गेज स्थल पर दर्ज किया गया है, जहाँ जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे अधिक जलस्तर है, जो 2024 में दर्ज किए गए पिछले अधिकतम 90.90 मीटर के रिकॉर्ड से 0.35 मीटर ऊपर है। इस पानी का प्रवाह पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों से होकर आगे बढ़ रहा है।
तटबंधों पर बढ़ा दबाव, दो जगह हुए क्षतिग्रस्त
गंडक में अत्यधिक जलश्राव के कारण तटबंधों पर भारी दबाव बना हुआ है। कई जगहों पर सीपेज, पाइपिंग और ओवरटॉपिंग की स्थिति भी सामने आई। जल संसाधन विभाग के अनुसार, अब तक 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या देखी गई, जिन पर तत्काल कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित किया गया है।
बढ़े हुए जलस्तर के बीच, पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध दो स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया। विभाग के मुताबिक, 28 और 29 सितंबर की मध्यरात्रि में बगहा-1 प्रखंड के खैरटवा गांव और बैरिया प्रखंड के फुलियाखाड़ गांव में तटबंध को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में भी गंडक नदी के दाएं तट पर बना एक तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है।
बाढ़ से निपटने की तैयारी और जलस्तर की निगरानी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जल संसाधन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है। विभाग ने चार दलों को मौके पर भेजा है, जिनमें से प्रत्येक दल बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज में तैनात है। कार्यपालक अभियंता के नेतृत्व में ये दल बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। विभाग के क्षेत्रीय अभियंता भी लगातार मौके पर सक्रिय हैं, और अप्रत्याशित जलश्राव को देखते हुए पहले से ही अतिरिक्त अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति की गई थी।
जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। गंडक के अपस्ट्रीम में जलस्तर घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है, जबकि डाउनस्ट्रीम में जलस्तर बढ़ रहा है। तटबंधों पर बने दबाव को देखते हुए, सभी संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं, ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।







