
Darbhanga: जनाब, अगर सेहत दुरुस्त रखनी है तो पोषण का कोई विकल्प नहीं! इसी मंत्र को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की स्नातकोत्तर इकाई ने एक दमदार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें छात्रों ने सेहत के पाठ सीखे।
यह कार्यक्रम कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. साधना शर्मा के संयोजन में संपन्न हुआ। डॉ. शर्मा ने स्वयंसेवकों को NSS के उद्देश्यों और कार्यों से परिचित कराते हुए पोषण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्लोगन और चार्ट के माध्यम से पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी का प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया। इस पोषण पखवाड़ा में छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस दौरान, महिला मंच की संयोजिका डॉ. एल. सविता आर्या ने गर्भवती माताओं के समुचित पोषण के महत्व पर विशेष जोर दिया।
NSS स्वयंसेवकों के लिए क्या हैं नियम? पोषण पखवाड़ा का संदेश घर-घर पहुंचाना लक्ष्य
डॉ. साधना शर्मा ने बताया कि प्रत्येक NSS स्वयंसेवक को प्रतिवर्ष 120 घंटे का सेवा कार्य करना अनिवार्य है। इसमें उनके लिए कई कार्यक्षेत्र निर्धारित हैं:
- 30 घंटे विश्वविद्यालय अथवा ‘माई भारत’ द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में।
- 30 घंटे गोद लिए गए गांव में।
- 30 घंटे अपने-अपने क्षेत्र में जन-जागरूकता गतिविधियों में।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी विद्यार्थियों को अपनी गतिविधियों का लेखा-जोखा एक डायरी में संधारित करना होगा, तभी उन्हें NSS प्रमाणपत्र प्राप्त होगा। साथ ही, सभी छात्र-छात्राओं को ‘माई भारत’ पोर्टल पर नामांकन कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।
स्वस्थ स्लोगन, स्वस्थ समाज: छात्रों ने बिखेरी रचनात्मकता
विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. निशिकांत सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के बीच स्लोगन लेखन गतिविधि भी कराई गई। इस NSS कार्यक्रम में छात्रों ने पोषण आहार से संबंधित आकर्षक एवं प्रेरक स्लोगन प्रस्तुत किए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस गतिविधि में पुष्पा, खुशबू, समीर, प्रीति, समीहा, सरोज, अंशु समेत कई स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।







