Bihar Entrepreneurship: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में उद्यमिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में, दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग में विश्व उद्यमी दिवस पर एक विशेष बौद्धिक विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘आत्मनिर्भर भारत को गतिशीलता- उद्यमियों की भूमिका’ रहा, जिसमें बिहार में उद्यमिता को बढ़ावा देने पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाणिज्य संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो एच के सिंह ने जोर देते हुए कहा कि उद्यमियों की सृजनात्मकता और नवाचार ने दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक-सामाजिक विकास के नए प्रतिमान गढ़े हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अवसर पर एक उद्यम स्थापित करने का संकल्प लें, तभी सही मायने में विश्व उद्यमी दिवस मनाना सार्थक होगा।
बिहार में उद्यमिता: चुनौतियां और सामाजिक स्वीकार्यता
बौद्धिक विमर्श की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन, बिहारगीत और विश्वविद्यालय कुलगीत के गायन से हुई। विभागीय शिक्षिका डॉ निर्मला कुशवाह ने सभी आगत अतिथियों और उपस्थित समूह का स्वागत किया। वाणिज्य के सह प्राध्यापक एवं प्रबंध कार्यक्रम के उप-निदेशक डॉ दिवाकर झा ने अमेरिका के विश्व-अगुआ बनने में उद्यमियों की भूमिका का वर्णन करते हुए विषय-वस्तु प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता दरभंगा पब्लिक स्कूल के निदेशक शैक्षिक उद्यमी डॉ विशाल गौरव ने बिहार, खासकर मिथिलांचल, में उद्यमियों के सामने आने वाली बाधाओं और उनके निवारण के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उद्यमिता के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है और उद्यमियों को समाज में स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। यह ‘बिहार Entrepreneurship’ के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करने का आह्वान
वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के अध्यक्ष एवं निदेशक डॉ राजकुमार साह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में एक सफल उद्यमी के आवश्यक गुणों पर बात की। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे आगे आएं, कर्मनिष्ठा के साथ तत्पर रहें और दूरदर्शी सोच के साथ उद्यमिता के मार्ग पर चलें। उनका मानना था कि ऐसा करके ही युवा समुदाय, राष्ट्र और विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। यह संदेश LNMU दरभंगा के छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहा।
प्रो एच के सिंह ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति तथा वर्ष-2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण हेतु उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत है और यह तभी संभव है, जब उद्यमी उपक्रम स्थापित करें, सफल संचालन करें एवं रोजगार प्रदाता बनें। हम संकल्प लें कि ‘विश्व उद्यमी दिवस’ के पावन अवसर पर एक उद्यम स्थापन की सोच रखेंगे, तभी सही अर्थ में इस अवसर को मनाया जाना सार्थक होगा।”
कार्यक्रम के अंत में, विभाग द्वारा आयोजित निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र वितरित किए गए। डॉ एस. के. ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया, और शोध अध्येता रजनीश कुमार चौधरी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ इस महत्वपूर्ण विमर्श का समापन हुआ, जिसने बिहार में उद्यमिता के भविष्य के लिए एक नई दिशा का संकेत दिया।






