Bihar Cabinet: बिहार के मुख्यमंत्री बिहार के हितों को लेकर दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मिले। सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अहम बैठक की। बांकीपुर उपचुनाव के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा है, जिससे इस यात्रा को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के साथ इस उच्चस्तरीय बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद संजय झा भी मौजूद रहे।
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे कर्तव्य भवन में शुरू हुई इस बैठक में केंद्र और बिहार सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत भी बैठक का हिस्सा रहे, जो दर्शाता है कि बातचीत में सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि बिहार से जुड़े प्रशासनिक और आर्थिक विषय भी प्रमुखता से शामिल थे। लगभग एक घंटे बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर कर्तव्य भवन से रवाना हो गए, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी और संजय झा की बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ जारी रही।
दिल्ली में बिहार कैबिनेट की बड़ी बैठक: CM सम्राट चौधरी ने इन दो केंद्रीय मंत्रियों से क्या मांगा?
Bihar Cabinet: मुख्यमंत्री बिहार के सम्राट चौधरी दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ कर्तव्य भवन में महत्वपूर्ण बैठकें कीं। बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा है, जिसे प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों ही नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। इन बैठकों में बिहार से जुड़े कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई अहम बैठकें
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे कर्तव्य भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक अहम बैठक शुरू हुई। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हुए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा भी मौजूद रहे। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा बने।
बैठक शुरू होने के लगभग एक घंटे बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर कर्तव्य भवन से रवाना हो गए। इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी और संजय झा की बैठक जारी रही। इन उच्चस्तरीय मुलाकातों से स्पष्ट है कि बिहार के विकास, वित्त और प्रशासन से जुड़े विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ है।
नेपाल सीमा और बिहार की वित्तीय जरूरतों पर फोकस
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े विषय और नेपाल में प्रस्तावित हाई लेवल डैम का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों के कारण बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा रहता है। ऐसे में हाई लेवल डैम को लेकर भारत और नेपाल के बीच बेहतर समन्वय बिहार की जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई चर्चा में बिहार की आर्थिक जरूरतों पर भी खास ध्यान दिया गया। केंद्र से मिलने वाली सहायता और राज्य की प्रमुख विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे एजेंडे में रहे। डिप्टी सीएम और मुख्य सचिव की मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि बैठक में बिहार के वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं पर विस्तार से मंथन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी, राजनीतिक मायने भी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया, ‘नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनाओं, बजट से जुड़े विषयों, पर्यटन के विकास और बिहार के हित से जुड़े अन्य अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और राज्यसभा सांसद संजय झा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास, समृद्धि और जनहित से जुड़े मुद्दों को केंद्र के सामने मजबूती से रखने और बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ने की दिशा में यह बैठक महत्वपूर्ण रही।’
सम्राट चौधरी का यह दौरा बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद हुआ है, जिससे इसकी राजनीतिक अहमियत भी बढ़ गई है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी संभावित मुलाकातों को लेकर भी अटकलें तेज हैं, हालांकि इस दौरे का मुख्य फोकस बिहार से जुड़े प्रशासनिक और विकास के मुद्दों पर ही रहा। यह बैठक केंद्र और बिहार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और राज्य की महत्वपूर्ण योजनाओं को गति देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
नेपाल सीमा और हाई लेवल डैम पर गंभीर चर्चा: बिहार को मिलेगी बाढ़ से राहत?
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे में बिहार से जुड़े कई रणनीतिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। इनमें भारत-नेपाल सीमा से जुड़े विषय बेहद अहम हैं। नेपाल में प्रस्तावित हाई लेवल डैम का मुद्दा भी इसमें शामिल था। बिहार की कई नदियां नेपाल से होकर आती हैं, और मानसून के दौरान इन नदियों के कारण राज्य के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। ऐसे में हाई लेवल डैम को लेकर भारत और नेपाल के बीच बेहतर समन्वय बिहार के लिए जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बिहार की वित्तीय जरूरतों पर केंद्र का फोकस: विकास परियोजनाओं को मिलेगा बल
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में बिहार की आर्थिक जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्र से मिलने वाली सहायता और राज्य की प्रमुख विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहे। मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि बैठक में बिहार के विकास, वित्त और प्रशासन से जुड़े विषयों पर गहराई से बात हुई। इस बैठक से बिहार की विकास परियोजनाओं को केंद्रीय सहयोग मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि ‘नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनाओं, बजट से जुड़े विषयों, पर्यटन के विकास और बिहार के हित से जुड़े अन्य अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और राज्यसभा सांसद संजय झा भी मौजूद रहे। बिहार के विकास, समृद्धि और जनहित से जुड़े मुद्दों को केंद्र के सामने मजबूती से रखने और बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ने की दिशा में यह बैठक महत्वपूर्ण रही।’
सम्राट चौधरी का यह दो दिवसीय दिल्ली दौरा बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों के ठीक बाद हो रहा है। इसलिए उनकी केंद्रीय नेताओं के साथ प्रस्तावित मुलाकातों पर राजनीतिक गलियारों में भी नजर बनी हुई है। हालांकि, इस दौरे का एक बड़ा हिस्सा बिहार से जुड़े प्रशासनिक और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहा है। इन बैठकों को बिहार के लिए केंद्र से सहयोग और जरूरी योजनाओं को गति देने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।








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