
Railway Encroachment: झंझारपुर में रेलवे की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे अतिक्रमणकारियों को हटाना इतना आसान नहीं! हाईकोर्ट के एक आदेश ने रेलवे के अतिक्रमण हटाओ अभियान पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है, जिसके बाद बुलडोजर खाली हाथ लौट गए।
मधुबनी जिले के झंझारपुर में कैथीनियां अंडरपास (एलएचएस 55) के पास रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम को मंगलवार को बिना कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा। भारी संख्या में पुलिस बल और रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद, माननीय उच्च न्यायालय के एक आदेश पत्र ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई को रोक दिया। रेलवे इस जमीन को खाली कराकर यहां अंडरपास पर कवर शेड बनाना और स्टेशन रोड का विस्तार करना चाहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
रेलवे अतिक्रमण: हाईकोर्ट ने पुराने नोटिस किए रद्द, अब नए सिरे से होगी कार्रवाई
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने माननीय उच्च न्यायालय का आदेश पत्र अधिकारियों को सौंप दिया। यह हाईकोर्ट का आदेश ही था जिसने तुरंत कार्रवाई पर रोक लगा दी। दंडाधिकारी के रूप में मौके पर मौजूद नगर परिषद के सिटी मैनेजर संजय कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट ने रेलवे द्वारा पूर्व में भेजे गए नोटिस को तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अतिक्रमणकारियों को नए सिरे से नोटिस जारी कर पूरी प्रक्रिया दोबारा अपनाई जाए। हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद प्रशासन ने सम्मान करते हुए बुलडोजर को वापस बुला लिया।
कवर शेड निर्माण और सड़क विस्तार में आ रही बाधा
रेल विभाग के आईओडब्लू रमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि रेलवे अतिक्रमण की कार्रवाई पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। विनोद ठाकुर, भागीरथ ठाकुर, मुनेश्वर कामत सहित अन्य सभी अतिक्रमणकारियों को जल्द ही दो बार नए नोटिस भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि रेल परियोजना के तहत अंडरपास पर कवर शेड बनाना और स्टेशन रोड को झंझारपुर-मधेपुर मुख्य मार्ग से जोड़ना आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अतिक्रमण मुक्त होने के बाद ही यह निर्माण कार्य सुगमता से पूरा हो सकेगा।
इस अभियान के दौरान सहायक मंडल इंजीनियर (दरभंगा) राजकुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर पुखराज मीणा, और आरएस थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष शत्रुंजय कुमार सहित मधुबनी पुलिस लाइन के जवान तैनात थे। हालांकि, दुकानदारों ने कार्रवाई के डर से अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था, लेकिन कानूनी पेंच के कारण फिलहाल उन्हें राहत मिल गई है। अब रेलवे नए सिरे से नोटिस भेजने की तैयारी में जुटा है।
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