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‘सरज रिट्रेक्टर’ : सिर्फ 20 ग्राम का डिवाइस, AIIMS पटना ने ब्रेन ट्यूमर सर्जरी को बनाया आसान; जानें कैसे?

Patna Health News: पटना एम्स ने 'सरज रिट्रेक्टर' नामक एक स्वदेशी न्यूरोसर्जिकल उपकरण विकसित किया है, जो ब्रेन ट्यूमर की जटिल सर्जरी को बेहद सरल और सटीक बनाएगा। यह अल्ट्रा-लाइट डिवाइस डॉक्टरों को ऑपरेशन में अधिक सुविधा देगी और पारंपरिक भारी उपकरणों की निर्भरता को कम करेगी।

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Patna Health News: पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। एम्स पटना ने ‘सरज रिट्रेक्टर’ नामक एक नया स्वदेशी न्यूरोसर्जिकल उपकरण विकसित किया है। यह डिवाइस ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में सटीकता और आसानी लाने के उद्देश्य से बनाई गई है। यह अल्ट्रा-लाइट उपकरण जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसके लिए आमतौर पर जटिल सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता होती है।

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यह अभिनव उपकरण एम्स पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सरज कुमार सिंह द्वारा विकसित किया गया है। संस्थान के नाम पर इसे डिजाइन पंजीकरण और ट्रेडमार्क सुरक्षा भी मिल चुकी है, जो इसकी मौलिकता और महत्व को दर्शाता है।

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क्या है ‘सरज रिट्रेक्टर’ और कैसे काम करता है?

ब्रेन रिट्रेक्टर न्यूरोसर्जरी में उपयोग किए जाने वाले आवश्यक उपकरण होते हैं, जिनका काम मस्तिष्क के ऊतकों को धीरे से पीछे हटाना होता है। इससे सर्जन को गहरे बैठे ट्यूमर और संवेदनशील इंट्राक्रैनीअल क्षेत्रों तक पहुँचने में मदद मिलती है। पारंपरिक प्रणालियाँ अक्सर भारी होती हैं, जिनका वजन लगभग 3.5 किलोग्राम होता है और इनमें कई घटक शामिल होते हैं।

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संस्थान के अनुसार, इन पारंपरिक उपकरणों को आमतौर पर दो से तीन ऑपरेटिंग रूम कर्मचारियों की सहायता की आवश्यकता होती है, जिससे प्रक्रिया की जटिलता और सेटअप का समय बढ़ जाता है। अपनी बहु-घटक संरचना के कारण वे यांत्रिक समस्याओं के प्रति भी अधिक संवेदनशील होते हैं। इसके विपरीत, ‘सरज रिट्रेक्टर’ का वजन लगभग 20 ग्राम है और इसमें एक एकल-जोड़ तंत्र है। इसे एक हाथ से संचालित किया जा सकता है, जिससे सर्जरी के दौरान नियंत्रण में सुधार होता है और अतिरिक्त कर्मियों पर निर्भरता कम होती है।

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सर्जरी होगी आसान, कम होगी निर्भरता

इस कॉम्पैक्ट संरचना को ऑपरेटिंग क्षेत्र में अव्यवस्था को कम करने और जटिल ट्यूमर हटाने की प्रक्रियाओं के दौरान दृश्यता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह सरलीकृत डिज़ाइन पारंपरिक प्रणालियों में देखी जाने वाली यांत्रिक विफलता के जोखिम को भी कम कर सकता है। भारत सरकार द्वारा इस उपकरण को ‘न्यूरोसर्जरी के लिए ब्रेन कॉर्टेक्स सेपरेटर इंस्ट्रूमेंट’ के रूप में पंजीकृत किया गया है। ‘सरज रिट्रेक्टर’ ट्रेडमार्क को भी आधिकारिक तौर पर मंजूरी मिल गई है, जो संभावित चिकित्सा उत्पाद व्यावसायीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा, “यह विकास वास्तविक सर्जिकल चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से चिकित्सक-नेतृत्व वाले नवाचार को दर्शाता है। यह डिवाइस स्वदेशी चिकित्सा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देकर और अनुसंधान-संचालित समाधानों के माध्यम से रोगी देखभाल में सुधार करके ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को मजबूत करती है।”

डिवाइस के डेवलपर डॉ. सरज कुमार सिंह ने बताया कि इसका उद्देश्य पारंपरिक रिट्रेक्टरों का एक हल्का, सरल और अधिक कुशल विकल्प बनाना था, साथ ही न्यूरोसर्जिकल प्रक्रियाओं के दौरान कई सहायकों पर निर्भरता को कम करना था।

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‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में कदम

एम्स पटना ने कहा कि यह नवाचार अनुसंधान-आधारित चिकित्सा प्रगति के बढ़ते पोर्टफोलियो में इजाफा करता है और सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उम्मीद है कि यह उपकरण देश भर के न्यूरोसर्जन का समर्थन करेगा और ब्रेन ट्यूमर सर्जरी के परिणामों में सुधार करेगा। यह Patna Health News भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, जो स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देता है।

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