बिहार बायोमेट्रिक अटेंडेंस न्यूज़: बिहार सरकार ने सरकारी कार्यालयों में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की घोषणा की है। राज्य में कार्यसंस्कृति को बेहतर बनाने और समय की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है।
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यह व्यवस्था 1 जून 2026 से प्रभावी होगी, जिसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। यह फैसला राज्य के पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक के सभी सरकारी दफ्तरों पर लागू होगा। सरकार का मानना है कि इससे कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी और अनावश्यक देरी पर अंकुश लगेगा।
सरकारी दफ्तरों में अब बायोमेट्रिक से ही मिलेगी सैलरी
बिहार में लंबे समय से सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। कई विभागों में कर्मचारी देर से पहुंचते थे और समय से पहले ही कार्यालय छोड़ देते थे, जिससे आम जनता के काम बाधित होते थे। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने तकनीक-आधारित निगरानी प्रणाली को पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया है। बिहार बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (BBAS) के माध्यम से कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही कर्मचारियों का वेतन भुगतान भी किया जाएगा। यह एक बड़ा Bihar Administrative Reform News है जो सीधे तौर पर कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा होगा। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर द्वारा जारी निर्देश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी सरकारी कर्मियों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य होगा। पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर कार्यरत सभी कर्मचारी अब BBAS के जरिए ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इससे उपस्थिति का वास्तविक डेटा तैयार होगा और मानव हस्तक्षेप की संभावना काफी कम हो जाएगी। यह कदम उपस्थिति दर्ज कराने की पुरानी और कई बार त्रुटिपूर्ण रही व्यवस्थाओं की जगह डिजिटल रिकॉर्ड को प्राथमिकता देगा।
देर से आने वालों पर क्या होगी कार्रवाई?
सरकार ने इस आदेश को सिर्फ उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसके उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं पहुंचता है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। देर से आने की स्थिति में कर्मचारी के अवकाश का समायोजन किया जा सकता है या उसके वेतन में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रावधान से कर्मचारियों पर समय का सख्ती से पालन करने का दबाव बढ़ेगा, जिससे कार्यालयों में अनुशासन कायम होगा।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अब कर्मचारियों का वेतन भुगतान बायोमेट्रिक उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी की वास्तविक उपस्थिति का असर सीधे तौर पर उसके मासिक वेतन पर दिखाई देगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने और कार्य में लापरवाही बरतने की संभावनाओं पर पूरी तरह से रोक लगेगी। इस व्यवस्था से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बल मिलेगा।
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आदेश में कार्यालय प्रमुखों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। प्रत्येक माह कार्यालय प्रमुखों को अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति का प्रिंट आउट तैयार करके उपलब्ध कराना होगा। इस प्रक्रिया से विभागीय स्तर पर उपस्थिति की नियमित समीक्षा की जा सकेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को समय रहते पकड़ा जा सकेगा, जिससे त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो सके।
सरकार ने बायोमेट्रिक मशीनों की कार्यप्रणाली पर भी विशेष ध्यान दिया है। जिन कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीनें खराब पड़ी हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से ठीक कराने का निर्देश दिया गया है। वहीं, जिन दफ्तरों में अभी तक बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित नहीं हो पाई हैं, वहां जल्द से जल्द इन्हें लगाने को कहा गया है, ताकि यह नई व्यवस्था लागू करने में कोई तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।
निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी पूरे जिले में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के संचालन और उसके उचित अनुपालन की निगरानी सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारियों को भी यह निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और अपने क्षेत्र में किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी न होने दें। यह कदम बिहार सरकार के सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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