Patna Cyber Fraud: राजधानी पटना में एक बड़े साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जहां सस्ते प्लास्टिक दाना का लालच देकर एक कारोबारी से 3 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये की महाठगी कर ली गई। जालसाजों ने फर्जी कंपनियों और जीएसटी बिल का सहारा लेकर धीरज नामक व्यवसायी को करोड़ों का चूना लगाया। इस घटना के बाद साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिससे ऐसे संगठित गिरोहों का पर्दाफाश हो सके।
कैसे फंसा कारोबारी जालसाजों के बिछाए जाल में?
खाजेकलां इलाके के रहने वाले धीरज प्लास्टिक के कचरे को रीसायकल कर प्लास्टिक दाना तैयार करने का काम करते हैं। रानीपुर में उनकी ‘धीरज प्लास्टिक वर्क्स’ नाम की एक रजिस्टर्ड फैक्ट्री है। कुछ समय पहले संजय पॉल नामक एक व्यक्ति उनके कार्यालय आया और खुद को प्लास्टिक दाना के कच्चे माल का बड़ा ब्रोकर बताया। संजय पॉल ने धीरज को बाजार दर से काफी कम कीमत पर थोक में कच्चा माल उपलब्ध कराने का आकर्षक प्रस्ताव दिया।






संजय पॉल के झांसे में आकर कारोबारी धीरज ने उसे भारी मात्रा में कच्चे माल का ऑर्डर दे दिया। इसके बाद आरोपी ब्रोकर ने माल भेजने के नाम पर एडवांस और भुगतान के लिए ‘बालाजी ट्रेडर्स’ और ‘ट्रिनिटी ब्रॉडवे कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक दो कंपनियों के बैंक खातों की जानकारी धीरज को दी, और उनमें पैसे ट्रांसफर करने को कहा।
फर्जी जीएसटी बिल से जीता भरोसा, फिर मोबाइल बंद
व्यापारिक भरोसा करते हुए धीरज ने आरोपी के बताए अनुसार दोनों कंपनियों के बैंक खातों में अलग-अलग तारीखों पर कई बार में कुल 3 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये की बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी। करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने के बाद, आरोपी संजय पॉल ने कारोबारी धीरज को पूरी तरह आश्वस्त करने के लिए एक बाकायदा जीएसटी बिल भी थमा दिया। इस आधिकारिक दिखने वाले बिल को पाकर पीड़ित व्यवसायी को यकीन हो गया कि उन्हें जल्द ही कच्चा माल मिल जाएगा।
हालांकि, इस प्रक्रिया के कुछ ही दिनों बाद संजय पॉल का मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गया और धीरज का उससे हर प्रकार का संपर्क टूट गया। माल की डिलीवरी न होने और ब्रोकर का फोन बंद होने के बाद पीड़ित कारोबारी के मन में अनहोनी की आशंका गहरा गई।
जांच में हुआ खुलासा, शेल कंपनियां थीं सिर्फ ठगी का हथियार
पीड़ित कारोबारी धीरज ने जब अपने स्तर पर उन दोनों कंपनियों के संबंध में गहराई से जानकारी जुटानी शुरू की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में पता चला कि जालसाजों ने उन शेल कंपनियों का निर्माण केवल लोगों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से ही किया था। यह भी खुलासा हुआ कि वे संगठित रूप से साइबर ठगी का एक बड़ा नेटवर्क चला रहे हैं, जिसमें संजय पॉल मुख्य ब्रोकर की भूमिका निभा रहा था।
जब धीरज को पूरी तरह पता चल गया कि उनके साथ ठगी हुई है, तो उन्होंने तुरंत साइबर थाना पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने केस दर्ज कर इस बड़े बिहार फ्रॉड की जांच तेज कर दी है, ताकि जालसाजों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके और ऐसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।








