Bihar Graduation Internship: अब बिहार के विश्वविद्यालयों से स्नातक की डिग्री लेने वाले छात्र-छात्राओं के लिए इंटर्नशिप करना अनिवार्य होगा। राज्य के राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर सभी विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन के छात्रों को 4 से 6 सप्ताह की इंटर्नशिप करनी होगी। यह नया नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया गया है, जिसका सीधा असर लाखों छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा।

राज्यपाल सचिवालय की ओर से इस संबंध में सभी कुलपतियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। यह इंटर्नशिप स्नातक पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा होगी और छात्रों को इसे सफलतापूर्वक पूरा करना होगा।


अनिवार्य इंटर्नशिप: क्या हैं नए नियम?
स्नातक पाठ्यक्रम के तहत अब छात्रों को 4 से 6 सप्ताह की इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। यह इंटर्नशिप पांचवें सेमेस्टर में चार क्रेडिट का एक अनिवार्य हिस्सा होगी। प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत रूप से 120 घंटे का इंटर्नशिप अनुभव पूरा करना होगा। यह व्यवस्था चार वर्षीय सीबीसीएस आधारित स्नातक पाठ्यक्रमों में एग्जिट प्वाइंट (द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के बाद) के साथ-साथ लागू की गई है, जो पांचवें सेमेस्टर से पहले होने वाली अनिवार्य इंटर्नशिप पर भी प्रभावी होगी।
छात्रों को कब और कितने घंटे करनी होगी इंटर्नशिप?
इंटर्नशिप की यह व्यवस्था मुख्य रूप से पांचवें सेमेस्टर से पहले छात्रों को अपना अनुभव प्राप्त करने का अवसर देगी। इसका उद्देश्य छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल से भी लैस करना है, जिससे वे भविष्य के करियर के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। दरअसल, कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने जून 2026 में ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत तैयार ‘इंटर्नशिप गाइडलाइंस फॉर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स इन यूनिवर्सिटीज ऑफ बिहार’ को अपनी मंजूरी दे दी थी।
इस पहल से छात्रों को डिग्री पूरी होने से पहले ही व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो उन्हें भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करेगा। यह नई व्यवस्था बिहार के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी, जिससे छात्रों की स्किल डेवलपमेंट पर सीधा असर पड़ेगा।







