Bihar Police Encounter: बिहार के मनेर में हुए पुलिस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जिसने Bihar Police Encounter की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नव निर्वाचित एमएलसी संजीव कुमार ने इस मामले में सीधे तौर पर सरकार और पुलिस के रवैये पर उंगली उठाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में ऐसी स्थिति बनती दिख रही है, जहां पुलिस ही जज और पुलिस ही अदालत बन गई है। यह बयान राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को और गहरा कर रहा है।

संजीव कुमार ने जोर देकर कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई बेहद जरूरी है, इसमें कोई संदेह नहीं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने या उसे सजा सुनाने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ न्यायालय के पास है। उन्होंने मनेर एनकाउंटर के संदर्भ में पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।


पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल: संविधान से ऊपर नहीं कोई
‘बिहार में ऐसी स्थिति बनती दिख रही है, जहां पुलिस ही जज और पुलिस ही अदालत बन गई है।’ – संजीव कुमार, राजद एमएलसी
राजद एमएलसी संजीव कुमार ने आगे कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार, यदि पुलिस खुद यह तय करने लगे कि कौन दोषी है और किसे क्या सजा मिलनी चाहिए, तो ऐसे में न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश का संविधान कानून के शासन की व्यवस्था देता है, जिसके तहत अपराध की जांच पुलिस करती है, लेकिन दोष और सजा का निर्धारण अदालत का काम है।
उन्होंने पुलिस की जिम्मेदारी को स्पष्ट करते हुए कहा कि पुलिस का काम केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना, मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाना और उन्हें न्यायालय के सामने पेश करना है। किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित करना पुलिस का अधिकार क्षेत्र नहीं है; यह काम पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। संजीव कुमार ने इस बात पर भी जोर दिया कि कानून की व्यवस्था में हर संस्था की अपनी भूमिका और सीमाएं तय हैं, और किसी को भी अपनी सीमा से बाहर जाकर काम नहीं करना चाहिए।
फर्जी एनकाउंटर पर निष्पक्ष जांच की मांग
मनेर एनकाउंटर को लेकर राजद नेता ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिसकर्मियों पर हमला या उनकी हत्या की स्थिति में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी पर निर्दोष व्यक्ति की जान लेने या फर्जी एनकाउंटर में शामिल होने का आरोप लगता है, तो उसकी भी उतनी ही निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप साबित होने पर संबंधित पुलिसकर्मियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि कानून सभी के लिए समान रहे।
‘पुलिस को कानून लागू करने का अधिकार है, लेकिन न्याय देने का अधिकार न्यायपालिका के पास है।’ – संजीव कुमार, राजद एमएलसी
संजीव कुमार ने सवाल उठाया कि बिहार में आखिर ऐसी व्यवस्था क्यों बनती जा रही है, जहां पुलिस की जवाबदेही को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि पुलिस को कानून लागू करने का अधिकार है, लेकिन न्याय देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाती।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील: पारदर्शी हो कार्रवाई
राजद के नव निर्वाचित एमएलसी ने इस मामले में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून के शासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए और हर मामले में निष्पक्ष जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मनेर Bihar Police Encounter को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच संजीव कुमार का यह बयान बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है। उनके बयान में पुलिस की भूमिका, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान के तहत नागरिकों के अधिकारों पर जोर दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में पुलिस का काम कानून लागू करना है, न्याय सुनाने का अधिकार अदालत का है। बिहार को पुलिस की मनमानी नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार चलने वाली व्यवस्था चाहिए। पुलिस को कानून का रक्षक बनकर काम करना चाहिए, न कि कानून से ऊपर होकर। न्यायिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए हर मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई बेहद जरूरी है। वहीं, बीजेपी ने इस मामले में राजद को जवाब देते हुए कहा है कि ‘बिहार में ऐसे ही एनकाउंटर करेगी सम्राट की पुलिस…’, जिससे यह मुद्दा और गरमा गया है।







