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Bihar News: बिहार हीटवेव… लू और जल संकट से निपटने को सरकार अलर्ट, मुख्य सचिव ने दिए कड़े निर्देश, मानसून पर भी बड़ा अपडेट

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बिहार हीटवेव: बिहार में प्रचंड गर्मी और लू का कहर जारी है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। इसी बीच, राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने लू और पेयजल आपूर्ति की स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें भविष्य के मानसून को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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पटना: बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने शुक्रवार को ‘हीट वेव’ (लू) के प्रबंधन और राज्य में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान आगामी मानसून और तापमान की प्रवृत्तियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत बिहार मौसम सेवा केंद्र (BMSK) के अधिकारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्य सचिव ने इस दौरान बिहार हीटवेव के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

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लू और पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने जानकारी दी कि राज्य में कुल 1,29,095 जलापूर्ति योजनाएं संचालित हैं, जिनमें विभाग द्वारा निर्मित 50,081 और पंचायती राज विभाग से हस्तांतरित 70,157 योजनाएं शामिल हैं। ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत लगभग 186.20 लाख परिवारों को नल का जल प्राप्त हो रहा है, जिससे उपलब्धि 92% तक पहुँच गई है। जलापूर्ति की गुणवत्ता जांच के लिए राज्य में 1 राज्य स्तरीय, 38 जिला स्तरीय और 75 अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।

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गर्मी के मौसम में निर्बाध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए हैं। राज्य में कुल 8,76,337 चापाकल चिन्हित हैं, जिनमें से चालू वर्ष में अब तक 1,15,011 चापाकलों की मरम्मत की जा चुकी है। राज्य स्तर पर एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (टोल फ्री नंबर: 1800-123-1121) और सभी प्रमंडलों/जिलों में स्थानीय नियंत्रण कक्ष 24×7 कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, चापाकलों और नल-जल योजनाओं की त्वरित मरम्मत हेतु राज्य में 525 चलंत मरम्मती दल सक्रिय किए गए हैं। समीक्षा में कुछ योजनाओं में पंप चालक के मानदेय, बिजली संबंधी समस्याओं, भूमि की अनुपलब्धता और सड़क कटाई जैसी बाधाएं सामने आईं।

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। मुख्य सचिव ने इन बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने का निर्देश दिया।

बिहार हीटवेव से निपटने के कड़े निर्देश

भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों को निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:

  • जीरो टॉलरेंस: पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जहाँ भी पाइपलाइन या चापाकल खराब हैं, उन्हें 24 घंटे के भीतर ठीक किया जाए।
  • टैंकरों की तैनाती: पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकरों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • बिजली विभाग से समन्वय: बिजली की समस्या के कारण बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं को शुरू करने के लिए संबंधित विद्युत प्रमंडलों के साथ तत्काल समन्वय स्थापित करें।
  • निगरानी और फीडबैक: अधिकारी स्वयं क्षेत्रों का दौरा करें और जनप्रतिनिधियों व स्थानीय जनता से पेयजल आपूर्ति का फीडबैक लें। कंट्रोल रूम में प्राप्त शिकायतों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित हो।
  • पंप ऑपरेटरों का भुगतान: यह सुनिश्चित किया जाए कि पंप चालकों का मानदेय लंबित न रहे, ताकि योजनाओं का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे।
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मानसून पूर्वानुमान और संभावित चुनौतियाँ

बिहार मौसम सेवा केंद्र (BMSK) द्वारा वर्ष 2026 के मानसून पूर्वानुमान और तापमान की प्रवृत्तियों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। 1 मार्च से 27 अप्रैल 2026 के बीच राज्य के विभिन्न अंचलों में तापमान में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है, विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिमी (SW) और दक्षिण-मध्य (SC) जोन में तापमान लगातार सामान्य से ऊपर बना हुआ है। पूर्वानुमान के अनुसार, 27 अप्रैल से 05 मई 2026 तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है।

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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि बिहार मौसम सेवा केंद्र के मानसून पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष जून और जुलाई के महीनों में ‘सामान्य से कम’ (Below Normal) वर्षा होने की संभावना है। हालांकि, मानसून के उत्तरार्ध (अगस्त-सितंबर) में स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन शुरुआती महीनों में बारिश की कमी कृषि और जल संचयन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। उत्तर-पूर्वी (NE) और दक्षिण-पूर्वी (SE) बिहार के कुछ हिस्सों को छोड़कर राज्य के मध्य और पश्चिमी भागों में वर्षा की कमी अधिक देखी जा सकती है।

आगे की रणनीति और विभागों को निर्देश

पूर्वानुमान और बढ़ते तापमान को देखते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों को व्यापक निर्देश जारी किए हैं:

  • पेयजल की उपलब्धता: हीट वेव और कम बारिश की स्थिति में भू-जल स्तर गिरने की संभावना को देखते हुए PHED को सभी चापाकलों और नल-जल योजनाओं की चालू स्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
  • स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट: लू से होने वाली बीमारियों और ‘सनस्ट्रोक’ के मामलों से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में विशेष वार्ड और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारियों को लगातार सिवल सर्जनों के साथ बैठक करने को कहा गया है।
  • जन-जागरूकता: BMSK ऐप और अन्य माध्यमों से किसानों और आम जनता तक सटीक मौसम पूर्वानुमान पहुँचाने के लिए व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
  • नियमित मॉनिटरिंग: अगले एक सप्ताह (27 अप्रैल से 05 मई) तक तापमान और बारिश के पैटर्न पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति के लिए आपदा प्रबंधन विभाग को तैयार रखा जाए।
  • निर्बाध बिजली आपूर्ति: गर्मी के कारण बढ़ते लोड के बावजूद राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से जलापूर्ति योजनाओं के पंप चलाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर बिजली दी जाए। लू के दौरान ट्रांसफार्मर जलने या तार टूटने की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हेतु हर प्रमंडल में विशेष ‘क्विक रिस्पांस टीम’ (QRT) तैनात की जाए।
  • पशुधन सुरक्षा और चिकित्सा: लू की स्थिति में पशुओं को ‘हीट स्ट्रोक’ से बचाने के लिए सभी पशु चिकित्सालयों में जीवन रक्षक दवाओं और ओआरएस (ORS) का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। पशुओं के पीने के पानी के लिए सार्वजनिक हौदों और तालाबों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करें। जहाँ आवश्यकता हो, वहां टैंकरों के माध्यम से पशुओं के लिए पानी पहुँचाया जाए।
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