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लाखों की ठगी! बिहार के युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर धोखा, STF ने दबोचे दो बड़े एजेंट

Bihar Job Fraud: सीमांचल के युवाओं को दुबई, मलेशिया भेजने के नाम पर लाखों ऐंठने वाले हाजी नाहिद गनी और मोहम्मद तवरेज गिरफ्तार, एसटीएफ की मदद से पटना में हुई बड़ी कार्रवाई।

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Bihar Job Fraud: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे कथित ठगी के बड़े नेटवर्क पर किशनगंज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ की मदद से पटना में छापेमारी कर पुलिस ने हाजी नाहिद गनी और मोहम्मद तवरेज नाम के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उन बेरोजगार युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिन्हें विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया था।

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पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने इन आरोपियों को दबोचा है। हाजी नाहिद गनी पूर्णिया जिले के रौटा का निवासी है, जबकि दूसरा आरोपी मोहम्मद तवरेज अनगढ़ क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। दोनों के खिलाफ किशनगंज और पूर्णिया जिले के विभिन्न थानों में धोखाधड़ी और मानव तस्करी से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।

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युवाओं को ठगी का शिकार बनाने का तरीका

आरोपों के मुताबिक, ये एजेंट बेरोजगार युवाओं को दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। विदेश भेजने के एवज में उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, पैसों के लेनदेन और विदेशों में मौजूद उनके संपर्कों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। सीमांचल में विदेश भेजने के नाम पर कथित ठगी और अवैध प्रवासन से जुड़े मामलों की चर्चा इन गिरफ्तारियों के बाद फिर से तेज हो गई है।

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पुलिस के अनुसार, हाजी नाहिद गनी और मोहम्मद तवरेज से जुड़े मामले किशनगंज के कोचाधामन, बहादुरगंज और विशनपुर थानों के साथ-साथ पूर्णिया जिले के रौटा थाना में दर्ज कांडों में उल्लेखित हैं। इन मामलों में धोखाधड़ी और मानव तस्करी से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत गहन जांच चल रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।

दुबई और मलेशिया में फंसे युवाओं की आपबीती

इस साल अगस्त में पूर्णिया के अमौर और किशनगंज के कोचाधामन क्षेत्र के सात युवकों के दुबई में फंसे होने का मामला सामने आया था। इन युवकों ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लिए गए थे, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उन्हें न तो वादा की गई नौकरी मिली और न ही कोई काम।

दुबई में फंसे युवकों ने आरोप लगाया था कि उनके पासपोर्ट एजेंट के पास थे। उनके पास मौजूद पैसे खत्म हो गए थे, जिससे रहने और खाने-पीने का इंतजाम करना मुश्किल हो गया था। वीडियो सामने आने के बाद किशनगंज के पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने युवकों से वीडियो कॉल पर बात की थी। बातचीत के दौरान एक युवक ने बताया कि वे 17 दिनों से परेशान थे और भोजन-रहने की व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया था।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन युवकों को भी हाजी नाहिद गनी ने ही विदेश भेजा था। यह पहलू पुलिस जांच में दुबई में फंसे युवकों के मामले को और भी महत्वपूर्ण बना रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि युवकों को विदेश भेजने की प्रक्रिया क्या थी और नौकरी दिलाने के लिए उनसे किस तरह का समझौता किया गया था।

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‘डंकी रूट’ से मलेशिया भेजने का मामला

विदेश में नौकरी के नाम पर रकम लेने का एक अन्य गंभीर मामला किशनगंज जिले के विशनपुर थाने में दर्ज कांड संख्या 47/26 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मोहम्मद सुलेमान ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे नूरजफर को विदेश भेजने के नाम पर 1.80 लाख रुपये लिए गए थे। शिकायत के अनुसार, नूरजफर को 9 सितंबर 2026 को पटना से दिल्ली ले जाया गया और फिर थाईलैंड के क्राबी भेजा गया। आरोप है कि 18 सितंबर को उसे ‘डंकी रूट’ के जरिए अवैध रूप से मलेशिया में प्रवेश कराया गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मलेशिया पहुंचने के बाद नूरजफर को कई अन्य युवकों के साथ एक कमरे में रखा गया और बाद में जोहोर स्थित बायोसीन एसडीएन बीएचडी नामक कंपनी में काम पर लगाया गया। एसडीपीओ खुसरु सिराज के अनुसार, मलेशियाई इमिग्रेशन पुलिस की छापेमारी के दौरान कई युवकों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन नूरजफर जंगल में छिपकर गिरफ्तारी से बच निकला और बाद में स्थानीय एजेंट की मदद से भारत लौट आया। पुलिस इस मामले में यह पता लगा रही है कि युवकों को मलेशिया तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी और वहां उनके रहने तथा काम करने की व्यवस्था किसने की थी।

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आगे की जांच और नेटवर्क का खुलासा

नूरजफर से जुड़ा यह मामला विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले युवाओं की यात्रा, वीजा और काम से संबंधित व्यवस्थाओं की जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस के सामने अब यह चुनौती है कि संबंधित युवकों को किस प्रकार के रोजगार का आश्वासन दिया गया था, उनसे ली गई रकम किन लोगों तक पहुंची और विदेश भेजने के लिए किन रास्तों व संपर्कों का इस्तेमाल किया गया। हाजी नाहिद गनी और मोहम्मद तवरेज की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों का पता लगाने में जुटी हुई है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या दोनों आरोपी अलग-अलग मामलों में एक ही तरह से युवाओं को विदेश भेजने की व्यवस्था करते थे। विदेश में मौजूद संपर्कों और स्थानीय एजेंटों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि इस पूरे अवैध धंधे का पर्दाफाश किया जा सके।

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