Bihar Model School: पटना। बिहार के लगभग बिहार के मॉडल स्कूलों की व्यवस्था और शैक्षणिक सुविधाओं की अब बारीकी से जांच होगी। शिक्षा विभाग ने राज्य के करीब 700 मॉडल स्कूलों, जिन्हें सरस्वती विद्या निकेतन के नाम से भी जाना जाता है, का निरीक्षण कराने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस पहल का सीधा असर हजारों छात्रों के भविष्य और राज्य में शिक्षा के स्तर पर पड़ेगा।
30 सितंबर को होगी स्कूलों की पड़ताल, हर पहलू पर नजर
विभाग ने इन स्कूलों की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की है। यह टीम 30 सितंबर को विभिन्न मॉडल स्कूलों का दौरा करेगी। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में किए गए बदलावों और विकसित की गई व्यवस्थाओं की अद्यतन स्थिति को जानना है। शिक्षा सचिव ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक में इस संबंध में विस्तृत निर्देश दिए हैं। बैठक में मॉडल स्कूलों की आधारभूत संरचना, शैक्षणिक गुणवत्ता और अन्य व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई।

अधिकारी स्कूलों की इमारत, कक्षा-कक्ष, स्मार्ट क्लास, लैब, पुस्तकालय, पेयजल, शौचालय, बिजली व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की जांच करेंगे। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं (जेईई-नीट) की तैयारी के लिए संचालित मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, समय-सारणी का पालन और छात्रों के अधिगम स्तर का भी मूल्यांकन किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान फोटो और वीडियो भी लिए जाएंगे, जिन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
निगरानी मजबूत करने के लिए नए कदम और साप्ताहिक मूल्यांकन
शिक्षा विभाग ने हाल ही में इन स्कूलों की निगरानी मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। प्रत्येक मॉडल स्कूल के लिए एक जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया जा रहा है। ये अधिकारी स्कूल को ‘गोद’ लेंगे और नियमित निरीक्षण करेंगे, जिससे सीधे तौर पर जवाबदेही तय होगी। नोडल अधिकारी हर सप्ताह कम से कम एक कक्षा खुद लेंगे, जिससे उन्हें जमीनी हकीकत का पता चलेगा। इसके अलावा, विभाग ने साप्ताहिक मूल्यांकन प्रणाली भी शुरू करने का फैसला लिया है। अब हर मंगलवार को विषयवार टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। इन टेस्ट के प्रश्न ब्लैकबोर्ड पर लिखे जाएंगे और शिक्षक उसी दिन मूल्यांकन कर छात्रों को तत्काल फीडबैक देंगे, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा।

