Bihar Railway News: पूर्व मध्य रेलवे ने बिहार और झारखंड के बिजली संयंत्रों को कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और मालगाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस दिशा में रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने गया-कोडरमा-हजारीबाग टाउन-अरगडा-पतरातू-गढ़वा रोड रेलखंड का सघन ‘विंडो ट्रेलिंग’ निरीक्षण किया है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रैंड कॉर्ड (GC) लाइन के बेहद संवेदनशील गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में स्थित टनल संख्या 01 का गहन जायजा लिया।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस दुर्गम घाट सेक्शन में बीओबीआर (BOBR) रेक के सुरक्षित परिचालन को हरी झंडी देने के उद्देश्य से टनल संख्या 01 का रीडिजाइन किया जा रहा है। यह इंजीनियरिंग कार्य विशेष रूप से सुरंग के आंतरिक डाइमेंशन (आकार) को बढ़ाने पर केंद्रित है, ताकि भारी-भरकम और अधिक क्षमता वाले कोयला रेक बिना किसी बाधा के गुजर सकें। इस तरह का चुनौतीपूर्ण और जटिल काम युद्धस्तर पर जारी है, जो आधुनिक रेलवे इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है।
पिछले महीने, महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह की उपस्थिति में गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन की डाउन लाइन में एक खाली बीओबीआर रेक का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था। यह परीक्षण इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। अब इसी कड़ी में अप लाइन पर भी भारी-भरकम बीओबीआर रेक को सुचारू रूप से चलाने के लिए टनल को चौड़ा करने और उसकी ऊंचाई बढ़ाने का काम तेजी से हो रहा है, ताकि दोनों दिशाओं में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित होगा यह प्रोजेक्ट
इस अहम परियोजना से बिहार के बाढ़ और बरौनी स्थित एनटीपीसी (NTPC) बिजली घरों को सीधा और तात्कालिक फायदा मिलेगा। कोयले की ढुलाई का समय काफी कम हो जाएगा, जिससे इन संयंत्रों को ऊर्जा संकट से निपटने में मदद मिलेगी और बिजली उत्पादन के लिए कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी। यह कदम राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर कोयला न मिलने से बिजली उत्पादन प्रभावित होता है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (पूमरे) सरस्वती चंद्र ने इस मेगा प्रोजेक्ट की अहमियत साझा करते हुए बताया कि इस घाट सेक्शन में बीओबीआर रेक का ऑपरेशन पूरी तरह चालू हो जाने से मालगाड़ियों के समय में अभूतपूर्व बचत होगी। इससे वैगन टर्नअराउंड में उल्लेखनीय सुधार होगा और रेलवे की लोडिंग क्षमता में भी भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी। यह रेलवे के लिए अतिरिक्त राजस्व का एक बड़ा स्रोत बनेगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सुरक्षा और ट्रैक मजबूती पर विशेष ध्यान
विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने केवल टनल ही नहीं, बल्कि इस पूरे महत्वपूर्ण रेलखंड के विभिन्न स्टेशनों, छोटे-बड़े रेल पुलों और ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) विद्युत प्रणाली का भी बेहद बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने पथ-रचना और पटरियों (Tracks) की सुरक्षा व मजबूती का व्यक्तिगत रूप से जायजा लिया, साथ ही अधिकारियों को सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के कड़े निर्देश दिए। उनका जोर था कि परिचालन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस पहल से न केवल बिजली घरों को संकट के समय तेजी से कोयला मिलेगा, बल्कि रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ने से राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। इस अहम निरीक्षण के दौरान धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्र समेत मुख्यालय और मंडल के कई वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, इंजीनियर्स और रेल कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इन अधिकारियों की मौजूदगी इस बात पर जोर देती है कि Dhanbad Railway News के तहत यह परियोजना कितनी महत्वपूर्ण है और इसे कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह मेगा प्रोजेक्ट पूर्व मध्य रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो माल ढुलाई, ऊर्जा सुरक्षा और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस पहल से न केवल बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा, जिससे देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। पूर्व मध्य रेलवे अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बेहतर सेवाएं प्रदान करने की दिशा में लगातार अग्रसर है।







