Darbhanga Court: दरभंगा सिविल कोर्ट ने एक ऐसे मामले में न्याय का दरवाजा खोला है जो पिछले 25 सालों से लंबित था। अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी नवम, कुमार रितेश की अदालत ने आर्म्स एक्ट के तीन अपराधियों को कड़ी सजा सुनाई है। इस निर्णय के बाद अब मो. वाहिद, हलखोरी दास और विशो दास को एक-एक वर्ष का कारावास और एक हजार रुपये का अर्थदंड भरना होगा।
कोर्ट का यह फैसला अवैध हथियारों के खिलाफ एक मजबूत संदेश देता है। यह दर्शाता है कि न्याय मिलने में भले ही समय लगे, लेकिन अपराधियों को उनके किए की सजा अवश्य मिलती है।






25 साल पहले क्या था मामला?
13 अप्रैल 2001 को कमतौल थाना में दर्ज यह मामला पंचायत चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की आशंका से जुड़ा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एमसीसी के उग्रवादी अवैध हथियारों के साथ छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही कमतौल पुलिस की टीम मौके पर पहुंची।
अभियोजन पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया, “कमतौल पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पंचायत चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की संभावना को लेकर एमसीसी के उग्रवादी छुपे हुए हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस दल को देख तीन लोग भागने लगे। जिसे खदेड़कर पकड़ा गया तो उनके पास से दो देशी पिस्तौल और जिन्दा कारतूस बरामद की गई थी।”
पुलिस दल को देखकर तीनों आरोपी भागने लगे, लेकिन उन्हें खदेड़कर पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से दो देशी पिस्तौल और जिन्दा कारतूस बरामद किए गए थे।
कोर्ट ने किन धाराओं में सुनाई सजा?
अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी नवम, कुमार रितेश की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए मो. वाहिद (मो. हासीम उर्फ छोटक के पुत्र), हलखोरी दास (लालचंद दास के पुत्र) और विशो दास को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B) और धारा 26 के तहत दोषी पाया है। प्रत्येक धारा में एक-एक वर्ष का कारावास, यानी कुल एक वर्ष की सजा (क्योंकि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी) और एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया है।
यदि दोषी अर्थदंड जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें 15 दिनों का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। यह मामला लगभग 25 वर्षों से न्यायालय में लंबित था, जिसे अब दरभंगा कोर्ट ने निष्पादित कर दिया है।
दरभंगा सिविल कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ एक पुराने मामले का निपटारा करता है, बल्कि अवैध हथियार रखने वालों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। यह दर्शाता है कि न्याय मिलने में भले ही समय लगे, लेकिन अंततः दोषियों को उनके कर्मों की सजा भुगतनी पड़ती है।








