Bihar Teachers Protest: राज्य के बिहार में लाखों शिक्षकों का आक्रोश सातवें वेतनमान और सेवा शर्तों की स्पष्ट अधिसूचना की मांग को लेकर उबाल पर है। बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन (बीएसटीए) गोपगुट के आह्वान पर राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर शिक्षकों का अनिश्चितकालीन अनशन शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। 2 अक्टूबर से शुरू हुए इस बड़े आंदोलन में राजधानी सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन मूल कर्मचारियों की तरह सातवें वेतनमान का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इस अधूरे फैसले से प्रदेश के करीब 5.5 से 6 लाख शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित हैं, जिससे उनमें भारी निराशा है।
राज्यकर्मी का दर्जा सिर्फ ‘फर्स्ट कॉपी’, सरकार पर गंभीर आरोप
शिक्षक नेता अश्विनी पांडेय ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘लंबे संघर्ष और विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार ने कागजों में राज्यकर्मी का दर्जा तो दे दिया, लेकिन हकीकत में हमें असल राज्यकर्मी का ‘फर्स्ट कॉपी’ बनाकर छोड़ दिया गया है। जब तक सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान और अन्य भत्तों का लाभ नहीं मिलता, तब तक यह दर्जा केवल दिखावा है।’
धरना स्थल पर मौजूद शिक्षकों ने साफ कहा कि सरकार ने उन्हें केवल कागजी तौर पर राज्यकर्मी बनाया है, जबकि वास्तविक लाभों से वंचित रखा गया है।
MLC चुनाव के बाद ठंडे बस्ते में न जाए मांग: शिक्षकों को डर
आंदोलन में शामिल एक अन्य शिक्षक, मंटू कुमार पांडेय ने सरकार की मंशा पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री का कहना है कि मांगों की संचिका सरकार के पास विचाराधीन है और निर्णय होना बाकी है। मंटू पांडेय ने सवाल उठाया, ‘यह निर्णय कब होगा? फिलहाल एमएलसी चुनाव के चलते सरकार और विभाग में हलचल दिख रही है। डर इस बात का है कि चुनाव खत्म होते ही मामला फिर से ठंडे बस्ते में न डाल दिया जाए। इसी संशय के चलते शिक्षकों को सड़क पर उतरना पड़ा है।’
बीएसटीए गोपगुट के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सरकार सातवें वेतनमान और सेवा शर्तों को लागू करने की ठोस अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक अनशन और आंदोलन अनवरत चलता रहेगा। शनिवार को धरना स्थल पर आंदोलन की वर्तमान स्थिति, अनशन पर बैठे शिक्षकों के स्वास्थ्य और आगे की रणनीति साझा करने के लिए मीडिया वार्ता भी बुलाई गई, जिसमें संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने की चेतावनी दी। शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।







