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Bihar Politics: बीजेपी पॉलिटिक्स मॉडल: सम्राट चौधरी ने टोपी पहनने से किया इनकार, बिहार में सेट किया नया राजनीतिक फॉर्मूला

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बीजेपी पॉलिटिक्स मॉडल: बिहार की सियासत में इन दिनों ‘टोपी’ पर बड़ी बहस छिड़ी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुस्लिम टोपी पहनने से साफ इनकार कर दिया। इस घटना ने बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जहां उनके इस कदम को पीएम मोदी और सीएम योगी के अंदाज में बीजेपी के राजनीतिक मॉडल को स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है।

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‘टोपी’ नहीं, संदेश पर चर्चा

सम्राट चौधरी का यह कदम सिर्फ एक टोपी से इनकार भर नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरा बीजेपी पॉलिटिक्स मॉडल का संदेश निहित था। कार्यक्रम के दौरान टोपी पहनाने वाले व्यक्ति का हाथ पकड़कर उन्होंने जिस तरह के ‘तल्ख तेवर’ दिखाए, वह उनके चेहरे के भावों से भी साफ झलक रहा था। जानकारों का मानना है कि भाजपा के नए मुखिया का यह ‘एक्सपेरिमेंट’ पसंद न करना साफ संकेत है कि पार्टी की विचारधारा पर कोई समझौता नहीं होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रमाकांत चंदन का मानना है कि सम्राट चौधरी ने जो किया, वह न तो गलत है और न ही कुछ अलग। यह सीधे तौर पर भाजपा का स्थापित मॉडल है। चंदन कहते हैं कि ‘जो सम्राट चौधरी ने किया वो न केवल बिहार में बीजेपी मॉडल के लिए जरूरी है बल्कि सम्राट चौधरी के लिए भी उतना ही जरूरी है।’ उनके इस कदम ने बिहार की राजनीति अब किस दिशा में जाने वाली है, यह 48 घंटे के भीतर ही साफ कर दिया। उन्होंने राज्य में बीजेपी के राजनीतिक एजेंडे की नींव रख दी है।

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संघ को भी सीधा संदेश

रमाकांत चंदन के अनुसार, सम्राट चौधरी ने टोपी न पहनकर केवल बिहार की जनता को ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भी स्पष्ट संदेश दिया है। उनके इस एक्शन से यह साफ हो गया कि भले ही वह ‘संघ के स्वयंसेवक न हों, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा को पूरी तरह से मानते हैं।’ यह एक ऐसा संदेश है जो शीर्ष नेतृत्व और पार्टी के कार्यकर्ताओं दोनों के लिए मायने रखता है।

दरअसल, बिहार बीजेपी में एक धड़ा ऐसा भी था जो सम्राट के खिलाफ था। आरएसएस भी अपने स्कूल से निकले व्यक्तियों को बिहार का मुख्यमंत्री बनता देखना चाहता था, जबकि पार्टी का एक वर्ग पुराने और वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ता को यह ताज पहनाना चाहता था। दो महीने की लंबी कवायद के बाद भी फैसला सम्राट के पक्ष में गया था। आज मुस्लिम टोपी पहनने से इन्कार कर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी और इसकी विचारधारा के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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