
JDU Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची जारी कर दी है, जिसमें कई चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिले हैं। सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर हो रही है, जिनका नाम इस महत्वपूर्ण सूची में नदारद है।
जनता दल यूनाइटेड ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की जो नई सूची जारी की है, उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का नाम शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि फिलहाल उन्हें पार्टी संगठन में कोई औपचारिक पद नहीं दिया गया है। हालांकि, निशांत पिछले कुछ समय से लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं, जिससे यह अटकलें तेज हैं कि भविष्य में उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
निशांत कुमार की जदयू राजनीति में भूमिका और भविष्य
निशांत कुमार 3 मई से अपनी बहुप्रतीक्षित बिहार यात्रा पर निकलने वाले हैं। वे पश्चिमी चंपारण से अपनी यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं। इस दौरान उनका लक्ष्य राज्य के सभी 38 जिलों का दौरा करना और सीधे जनता से संवाद स्थापित करना है। इस बिहार यात्रा का मुख्य मकसद लोगों की समस्याओं को समझना और जमीनी हकीकत का जायजा लेना बताया जा रहा है। हाल ही में उन्होंने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 2005 से पहले बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, लोग डर के माहौल में जीते थे और अपराध आम बात थी। उन्होंने एनडीए सरकार बनने के बाद हालात में सुधार और विकास की रफ्तार बढ़ने का श्रेय दिया।
संगठन में प्रमुख बदलाव और संजय झा की वापसी
पार्टी ने एक बार फिर अनुभवी नेता संजय झा को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह दिखाता है कि जदयू राजनीति में उनके प्रभाव और नेतृत्व पर शीर्ष नेतृत्व का भरोसा बरकरार है। पहले जहां तीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुआ करते थे, अब इस पद पर केवल एक ही व्यक्ति को नियुक्त किया गया है। पूर्व सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को इस एकलौते उपाध्यक्ष पद की बागडोर मिली है। वहीं, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम रजक को महासचिव बनाकर उनकी भूमिका में बदलाव किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







