Bihar Flood: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बिहार में मौजूदा बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच वर्ष 2011 का अपना एक संसद वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। इस वीडियो के जरिए उन्होंने बिहार में बाढ़ की समस्या, नदियों के रखरखाव और राज्य के विकास के लिए केंद्र से आर्थिक सहायता की अपनी पुरानी मांग को एक बार फिर उठाया है। लालू प्रसाद ने केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार को केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान चाहिए।
बिहार की बाढ़ और लालू का पुराना संघर्ष
लालू प्रसाद ने अपने फेसबुक पोस्ट में बिहार के मुद्दों को लेकर संसद से लेकर केंद्र सरकार तक अपनी आवाज उठाने के पुराने राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में उन्होंने 2011 का वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में लालू प्रसाद बिहार में आने वाली बाढ़ को एक गंभीर समस्या बताते नजर आ रहे हैं। वह नदियों की स्थिति और उनके रखरखाव का मुद्दा उठाते हुए बिहार के विकास के लिए केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता की मांग करते दिखाई दे रहे हैं। लालू ने मौजूदा हालात को 2011 के दौर से जोड़ते हुए कहा कि बिहार की बाढ़ की समस्या आज भी खत्म नहीं हुई है और केवल तत्काल राहत देने से इस संकट का स्थायी समाधान नहीं होगा।
राजद अध्यक्ष ने वर्ष 2004 का भी जिक्र किया, जब वह राजद के 24 सांसदों के साथ यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान उन्होंने बिहार के लिए विकास योजनाओं में बड़ी राशि दिलाने की कोशिश की थी। लालू के अनुसार, वर्ष 2004 से 2009 के बीच बिहार के विकास के लिए करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने इस संदर्भ में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का भी नाम लिया। लालू का आरोप है कि उस दौर में बिहार के लिए स्वीकृत और उपलब्ध कराई गई राशि का राजनीतिक श्रेय बाद की सरकारों ने लिया। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के हित से जुड़े मुद्दों पर उनकी राजनीति हमेशा सकारात्मक रही है।
स्थायी समाधान और वर्तमान सरकार पर सवाल
बाढ़ के मुद्दे पर लालू प्रसाद ने राहत और मुफ्त अनाज की राजनीति से आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव या बाढ़ के समय तत्काल राहत की घोषणाएं समस्या का स्थायी हल नहीं हैं। उन्होंने नेपाल से आने वाली बाढ़ का मुद्दा भी उठाया, जिसके कारण बिहार के कई इलाकों में हर साल बाढ़ की स्थिति बनती है। उनके मुताबिक, इसके लिए नेपाल सरकार के साथ गंभीर और स्थायी बातचीत जरूरी है। इसी बीच, फरक्का जल संधि को लेकर विजय चौधरी जैसे नेताओं के बयान भी सामने आते रहे हैं, जो नदियों के प्रबंधन के जटिल पहलू को दर्शाते हैं।
लालू प्रसाद ने नदियों के रखरखाव पर होने वाले खर्च का सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार को नदियों के रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिले हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर द्वारा उठाए गए मुद्दों का भी उल्लेख किया। राजद अध्यक्ष ने बिहार से होने वाले पलायन को भी अपने पोस्ट का हिस्सा बनाया। उन्होंने सवाल किया कि बिहार के लोगों के आर्थिक योगदान के अनुपात में राज्य को संसाधन क्यों नहीं मिलते, जबकि राज्य के बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों और विदेशों में काम करते हैं और वहां से कमाया पैसा बिहार में भेजते हैं। उन्होंने बिहार के कम क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (सीडीआर) का मुद्दा भी उठाया, यह पूछते हुए कि बिहार में जमा होने वाली राशि के मुकाबले यहां कर्ज और निवेश का अनुपात कम क्यों बना हुआ है।
लालू प्रसाद ने अपने पोस्ट में कहा, “बिहार किसी से भीख नहीं मांग रहा है। राज्य अपने योगदान और जरूरत के मुताबिक संसाधन की मांग कर रहा है।”
लालू ने अपने पोस्ट में वर्ष 2011 की राजनीतिक स्थिति का भी जिक्र किया। उस समय केंद्र में यूपीए-2 की सरकार थी, जबकि बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और राज्य में एनडीए की सरकार थी। लालू ने कहा कि उस समय भी उन्होंने दिल्ली जाकर बिहार के सवालों को उठाया था। अब उन्होंने इसी पुराने वीडियो को मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति से जोड़ने की कोशिश की है। उनका कहना है कि आज केंद्र और बिहार दोनों जगह एनडीए की सरकार है, इसके बावजूद बिहार की बाढ़ और विकास से जुड़े सवाल बने हुए हैं। लालू ने इसी आधार पर सरकार से जवाब मांगने का राजनीतिक संदेश दिया है।







