Maithili Thakur Netherlands: नीदरलैंड्स में इन दिनों बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गूंज सुनाई दे रही है। प्रसिद्ध लोक गायिका और दरभंगा की अलीपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर वहां ‘इंडेलोस इंडिया फेस्टिवल’ में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दे रही हैं। उनकी मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार के लोकगीतों और परंपराओं को एक नई पहचान दी है।
भारतीय राजदूत ने किया विशेष स्वागत
नीदरलैंड्स पहुंचने के बाद मैथिली ठाकुर सीधे ‘इंडिया हाउस’ गईं। यहां भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने उनका और उनके परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया। भारतीय राजदूत ने बिहार से आए इस शिष्टमंडल और मैथिली ठाकुर के सम्मान में एक विशेष संध्या का आयोजन किया। यह आयोजन बिहार की कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

बिहार की संस्कृति पर हुई चर्चा
इस अवसर पर मैथिली ठाकुर ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस तरह बिहार के पारंपरिक गीत लोकजीवन की गहराई, रिश्तों की मिठास और मानवीय संवेदनाओं को अपने भीतर समेटे हुए हैं। उनके इस विवरण ने श्रोताओं को बिहार की आत्मा को समझने का अवसर दिया।
‘नैहर’ के चैती गीत से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
विशेष आयोजन के दौरान, मैथिली ठाकुर ने अपने मधुर कंठ से पारंपरिक चैती गीत ‘नैहर से केहू नहीं ऐले हो राम…’ प्रस्तुत किया। इस गीत के माध्यम से उन्होंने विवाह के बाद मायके से दूर ससुराल में रहने वाली लड़की की विरह वेदना और फागुन के बाद चैत्र मास में अपने प्रियजनों के इंतजार की सुंदर अभिव्यक्ति की।
नैहर से केहू नहीं ऐले हो राम…
मैथिली ठाकुर की इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने वहां मौजूद सभी अतिथियों को भावविभोर कर दिया। दर्शकों ने उनकी गायकी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि जिन्हें वे अब तक केवल टीवी पर देखते थे, उन्हें सामने से सुनना और देखना एक अद्भुत और बेहद सुखद अनुभव रहा। यह पल नीदरलैंड्स में Maithili Thakur Netherlands की यात्रा का एक यादगार हिस्सा बन गया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार की पहचान
मैथिली ठाकुर का यह नीदरलैंड्स दौरा बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह न केवल बिहार के लोकगीतों को बढ़ावा देता है, बल्कि प्रवासी भारतीयों और विदेशी दर्शकों को भी भारत की जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। उनकी प्रस्तुति ने साबित किया कि कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती।


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