Patna Flood News: पटना और इसके आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गंगा तथा पुनपुन नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, जिससे लोगों को जलभराव से थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, पानी घटने के साथ ही अब क्षेत्र में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने दूषित पानी और गंदगी के कारण फैलने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
कई इलाकों में अभी भी जलजमाव, कीचड़, गंदगी और कचरे की समस्या बनी हुई है। बाढ़ का पानी लंबे समय तक जमा रहने से उसमें नालों का गंदा पानी, कचरा, मलबा और अन्य दूषित पदार्थ मिल जाते हैं। यही दूषित पानी आसपास के हैंडपंप, कुएं और अन्य जलस्रोतों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।
बाढ़ का पानी घटने के बाद बढ़ा बीमारियों का खतरा
दूषित पानी के इस्तेमाल से डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की बाढ़ संबंधी सलाह में लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का भी जिक्र किया गया है। इन बीमारियों से बचाव के लिए साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल का सेवन अत्यंत आवश्यक है।
वहीं, पानी निकलने के बाद छोटे-छोटे गड्ढों, टूटे नालों और जलजमाव वाली जगहों पर मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने इन बीमारियों से बचाव के लिए भी विशेष उपाय करने की सलाह दी है।
पटना में लाखों लोग प्रभावित, स्वास्थ्य विभाग की विशेष अपील
पटना जिले के 14 अंचलों में बाढ़ का व्यापक असर देखा गया है। दीदारगंज, बख्तियारपुर, फतुहा, दानापुर, मनेर, पाटलिपुत्र, अथमलगोला, बाढ़, पुनपुन और मोकामा जैसे इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। जिले में करीब तीन लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
राज्य भर में 14 जिलों के 80 से अधिक प्रखंडों में लगभग 35 से 40 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आए। गंगा नदी दीघा घाट और गांधी घाट पर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, हालांकि उसके जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। पुनपुन नदी भी श्रीपालपुर में खतरे के निशान से काफी ऊपर रही, जिससे निचले इलाकों में पानी जमा रहा।
मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ को लेकर भी एक बड़ी खबर सामने आई है। इस पथ को बड़ी मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद एलिवेटेड रोड का रास्ता साफ हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और जागरूकता अभियान चलाने की बात कही है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे उबला हुआ पानी पिएं, मच्छरों से बचाव के उपाय करें और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। आने वाले दिनों में इन एहतियाती कदमों से ही संभावित स्वास्थ्य संकट को टाला जा सकेगा।







