Patna Professor Protest: बिहार की राजधानी पटना में J.D. वीमेंस कॉलेज के प्रोफेसरों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर मौके से हटा दिया, जिससे बीच सड़क पर भारी बवाल देखने को मिला। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है, जिसमें महिला शिक्षकों के साथ भी बदसलूकी का दावा किया गया है।
विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम वापस लेने की मांग
प्रोफेसर और कर्मचारी विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम को वापस लेने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि सरकार को इस अधिनियम को लेकर अपने फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल महिला
प्रोफेसरों की मुख्य मांग है कि उन्हें 76 एक्ट के तहत ही रखा जाए और वे 26 एक्ट के दायरे में नहीं जाना चाहती हैं। शिक्षकों और कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि उनकी इन मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
‘हम शांतिपूर्ण तरीके से लोकभवन जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें बीच रास्ते में रोक लिया और हमारे साथ मारपीट भी की। महिला शिक्षकों के साथ भी मिसबिहेव किया गया।’ – प्रदर्शनकारी प्रोफेसरों का आरोप
पुलिस ने बसों में भरकर हटाया, लगे दुर्व्यवहार के आरोप
धरने को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शन जारी था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रोफेसरों को बसों में बैठाकर वहां से ले जाना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ प्रोफेसर पुलिस की गाड़ी रोकने की कोशिश करते भी नजर आए। प्रोफेसरों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है और महिलाओं के साथ भी मिसबिहेव किया गया। उनका दावा है कि वे शांति से लोकभवन जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोककर मारपीट की।
पटना में शिक्षकों का फूटा गुस्सा, विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम पर पुलिस से झड़प!
Bihar Teachers Protest: बिहार में पटना के J.D. वीमेंस कॉलेज में विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में शिक्षकों और कर्मचारियों का प्रदर्शन उग्र हो गया। अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे प्रोफेसरों और कर्मचारियों को पुलिस ने बसों में बैठाकर हटा दिया। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे कॉलेज परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि सरकार विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम को तत्काल वापस ले। महिला प्रोफेसरों ने विशेष रूप से 76 एक्ट के तहत ही रखे जाने पर जोर दिया है, जबकि वे 26 एक्ट के अंतर्गत जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि वे अपनी सेवा शर्तों में बदलाव नहीं चाहतीं।
76 एक्ट बनाम 26 एक्ट: शिक्षकों की क्या है चिंता?
हालांकि, इन दोनों अधिनियमों के विस्तृत प्रावधानों और शिक्षकों की सेवा शर्तों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है, जैसा कि स्वयं प्रदर्शनकारियों ने भी बताया है। शिक्षकों का मानना है कि नए अधिनियम से उनकी वर्तमान सेवा शर्तें प्रभावित होंगी, इसलिए वे पुराने 76 एक्ट के तहत ही बने रहना चाहते हैं।
कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे प्रोफेसरों को जबरन बसों में बैठाया और वहां से ले गई। इस दौरान कुछ शिक्षकों ने पुलिस की गाड़ी को रोकने का प्रयास भी किया। शिक्षकों का दावा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लोकभवन की ओर जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया और आगे नहीं बढ़ने दिया।
शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और महिला शिक्षकों के साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने तो पुलिस पर मारपीट का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों पर पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे घटनाक्रम की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
शिक्षकों और कर्मचारियों का यह बिहार शिक्षक प्रदर्शन उस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर है, जिसे वे अपनी सेवा शर्तों के लिए खतरा मान रहे हैं। उनकी अपील है कि सरकार इस मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और अधिनियम को लागू करने के बजाय इसे वापस लेने पर विचार करे। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि प्रस्तावित बदलावों को लेकर संबंधित पक्षों की चिंताओं को सुना जाए और उनका समाधान किया जाए।
सरकार के अगले कदम पर टिकी नजरें
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या आगे की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रदर्शनकारी अधिनियम वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। अब इस पूरे मामले में सरकार और संबंधित प्रशासन की ओर से आने वाले बयान पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। अधिनियम से जुड़े प्रावधानों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।








You must be logged in to post a comment.