
Bihar Education News: पटना के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का माहौल बदलने वाला है। हाल ही में हुए निरीक्षण में खामियां मिलने के बाद जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मकसद बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें एक्टिव लर्निंग और सर्वांगीण विकास की ओर ले जाना है।
जिला शिक्षा कार्यालय, पटना ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रधानाध्यापकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हाल ही में जिले के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि विद्यालयों में शैक्षिक माहौल संतोषजनक नहीं था। इस पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक) सैफ़ुर रहमान ने कड़ी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि वे कैंपस को साफ़-सुथरा रखने के साथ-साथ ऐसा माहौल तैयार करें जहाँ छात्र खुलकर सीख सकें।
लैब में शैक्षणिक वातावरण और सक्रिय भागीदारी
जिला शिक्षा कार्यालय को यह भी जानकारी मिली थी कि स्कूलों में स्थित प्रयोगशालाओं (लैब) का उपयोग बहुत कम किया जाता है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सभी प्रधानाध्यापकों को सप्ताह में कम से कम तीन बार विद्यार्थियों के लिए प्रैक्टिकल क्लास आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए एक नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा, जो एक डायरी तैयार करेगा। इस डायरी में यह अंकित किया जाएगा कि लैब में किस विषय पर प्रैक्टिकल कराया गया। स्कूल के प्रधानाध्यापकों को प्रतिदिन इस लैब डायरी को अपडेट करना होगा। शिक्षकों को पाठ्यक्रम के अनुसार सभी विषयों की प्रैक्टिकल क्लास कराना अनिवार्य होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
छात्रों में जिज्ञासा और सक्रिय शिक्षा
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों को केवल सुनने की बजाय चर्चाओं, समूह परियोजनाओं, सामूहिक परिचर्चा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विज्ञान प्रदर्शनी, रोल प्ले और प्रयोगों में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए। शिक्षकों से कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के भीतर ऐसी जिज्ञासा पैदा करें ताकि वे स्वयं प्रश्न पूछें और उनके उत्तर भी खोजने का प्रयास करें। यह तरीका छात्रों को सीखने की प्रक्रिया में अधिक शामिल करेगा और उनके छात्र विकास में सहायक होगा।
लाइब्रेरी और डिजिटल मीडिया से दूरी
बच्चों के सर्वांगीण विकास और एक्टिव लर्निंग को ध्यान में रखते हुए स्कूल की लाइब्रेरी को सुदृढ़ बनाने का भी निर्देश दिया गया है। लाइब्रेरी में कोर्स की किताबों के साथ-साथ अख़बार और पत्रिकाएं रखने के साथ ही बच्चों में इन्हें पढ़ने की आदत विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। विद्यार्थियों में पढ़ने की नियमित आदत विकसित करने के लिए स्कूलों में ‘रीडिंग क्लब’ की शुरुआत करने का निर्देश दिया गया है। रीडिंग क्लब के गठन के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापक अपने स्तर पर एक नोडल शिक्षक को नामित करेंगे। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने छात्रों को इंटरनेट मीडिया से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही, शिक्षकों से भी कहा है कि वे बच्चों को इंटरनेट मीडिया के अत्यधिक उपयोग से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन सभी उपायों का उद्देश्य स्कूलों में एक उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण बनाना है जो छात्रों के भविष्य के लिए नींव का काम करे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







