Bihar Politics: बिहार की राजनीति में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बयानों ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। बिहार विधान परिषद चुनाव के प्रचार के बीच वैशाली में उन्होंने जहां पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अप्रत्याशित तारीफ की, वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। प्रशांत किशोर ने मतदाताओं से जाति-धर्म से ऊपर उठकर शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर वोट डालने की अपील की।
नीतीश कुमार की तारीफ, लेकिन मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
प्रशांत किशोर ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार के उन चुनिंदा 10 नेताओं में शामिल बताया, जिन्होंने राज्य को बेहतर बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बिहार के सबसे सुलझे हुए नेताओं में से एक रहे हैं और जब तक वे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहकर सक्रिय रहे, उन्होंने बिहार को सुधारने की कोशिश की। हालांकि, प्रशांत किशोर ने यह आरोप भी लगाया कि जब नीतीश कुमार स्वयं सक्रिय नहीं थे, तब उनके नाम पर कुछ अन्य लोग सत्ता चलाते रहे, जिससे कई गड़बड़ियां हुईं। उन्होंने उस दौर की ऐसी कई खामियों का विरोध करने की बात भी कही।
यह बयान अनंत सिंह के कथित नौ हत्याओं वाले विवादित बयान के संदर्भ में आया, जिस पर नीतीश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। प्रशांत किशोर ने इस मामले में नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उनकी जानकारी में नीतीश कुमार एक सुलझे हुए नेता हैं और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर उन्होंने सवाल उठाया।
सम्राट चौधरी पर सीधा हमला और ‘एनकाउंटर नीति’ पर प्रश्न
जन सुराज संस्थापक ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने सम्राट चौधरी को लेकर अपने पुराने बयानों पर सफाई देते हुए कहा कि उनके वक्तव्यों को काटकर और अधूरे संदर्भ में प्रसारित किया गया। प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता और कथित आपराधिक मामलों को लेकर अपनी टिप्पणियों को दोहराया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि उनके आरोप गलत हैं, तो सरकार उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया, ‘यदि पुलिस या प्रशासन ही तय करने लगे कि कौन अपराधी है और उसे गोली मार दी जाए, तो कानून और न्यायिक प्रक्रिया का क्या महत्व रह जाएगा?’
उन्होंने अपराध नियंत्रण के लिए कथित पुलिस कार्रवाई और ‘एनकाउंटर नीति’ पर भी प्रश्नचिह्न लगाए। प्रशांत किशोर ने कहा कि यह व्यवस्था मतदाताओं को तय करनी होगी कि वे मौजूदा स्थिति को जारी रखना चाहते हैं या उस पर अंकुश लगाना चाहते हैं।
जनता से अपील और आगामी रणनीति
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हो रहे चुनाव के प्रचार के लिए प्रशांत किशोर राज्य के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रहे हैं। वे मतदाताओं से जाति और धर्म के आधार पर मतदान करने के बजाय शिक्षा, रोजगार और स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता देने की लगातार अपील कर रहे हैं। वैशाली में उन्होंने लोगों से अपने और अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर वोट डालने का आग्रह किया। शिक्षकों से उन्होंने सम्मान और वेतनमान जैसे मुद्दों पर मतदान करने की अपील की। उन्होंने बांकीपुर का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव में उम्मीदवार और उसके काम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रशांत किशोर ने वैशाली में गंगा नदी में हुए नाव हादसे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घोषणा की कि वे 20 अक्टूबर, दशहरा के दिन, पीड़ित परिवारों के साथ समय बिताएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और एनडीए सरकार पर पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए पर्याप्त समय न निकालने का आरोप भी लगाया।






