Bihar Politics: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में पूर्व राजद सांसद साधु यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति और उनकी सक्रियता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव चुनाव को पूरी गंभीरता से लेते तो राजद उम्मीदवार तीसरे स्थान पर नहीं पहुंचता। साधु यादव ने जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत को लेकर भी अपना अलग नजरिया प्रस्तुत किया है।
बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए साधु यादव ने कहा कि राजद की हार केवल चुनावी गणित का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठन और नेतृत्व की सक्रियता से भी जुड़ा विषय है। उनके मुताबिक, चुनाव के दौरान शीर्ष नेतृत्व का लगातार मैदान में मौजूद रहना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने दावा किया कि यदि तेजस्वी यादव पूरे समय चुनाव अभियान में सक्रिय रहते तो राजद उम्मीदवार को कहीं अधिक समर्थन मिल सकता था।






तेजस्वी की सक्रियता पर उठाए गंभीर सवाल
साधु यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का चुनाव के दौरान विदेश जाना कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच गलत संदेश देता है। उनके अनुसार, जब चुनावी माहौल बन चुका था, तब नेतृत्व को जनता और कार्यकर्ताओं के बीच रहकर माहौल तैयार करना चाहिए था। उनका कहना था कि यदि ऐसा होता तो परिणाम अलग भी हो सकता था।
पूर्व सांसद ने तेजस्वी यादव को संगठन मजबूत करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि यदि राजद को भविष्य की चुनावी चुनौतियों का सामना करना है तो नेतृत्व को लगातार जनता के बीच जाना होगा। उनका कहना था कि केवल बड़े कार्यक्रमों से राजनीतिक आधार मजबूत नहीं होता, बल्कि रोजाना लोगों से संवाद और संगठन को सक्रिय रखना भी उतना ही जरूरी है।
प्रशांत किशोर की जीत का अलग विश्लेषण
साधु यादव ने जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर की जीत को लेकर भी एक अलग राजनीतिक व्याख्या की। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल किसी एक दल की लोकप्रियता का परिणाम नहीं है। उनके अनुसार, बांकीपुर की जनता ने अपने मतदान के जरिए सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्ष, दोनों को संदेश देने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस एक सीट के परिणाम के आधार पर पूरे बिहार की राजनीति का आकलन करना उचित नहीं होगा।
राजद के लिए चेतावनी और आत्ममंथन की जरूरत
साधु यादव ने यह भी कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम राजद के लिए एक चेतावनी की तरह है। यदि पार्टी समय रहते अपनी रणनीति और कार्यशैली में बदलाव नहीं करती है तो आगे और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके मुताबिक, चुनावी राजनीति में जनता से लगातार संपर्क बनाए रखना सबसे बड़ी ताकत होती है।
उन्होंने रोहिणी आचार्य के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने चुनावी हार के बाद आत्ममंथन की जरूरत बताई थी। साधु यादव ने कहा कि पार्टी को हार से सीख लेकर आगे की रणनीति तैयार करनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि नेतृत्व इस संदेश को गंभीरता से लेता है तो संगठन को फिर से मजबूती मिल सकती है। राजद के अंदरूनी हालात पर टिप्पणी करते हुए साधु यादव ने कहा कि पार्टी को आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन के भीतर उठ रहे सवालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, केवल चुनावी तैयारी ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूत करना समय की जरूरत है।








