
Samrat Chaudhary CM: मंगलवार का दिन बिहार के लिए ऐतिहासिक रहा, जब नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना गया। आज बुधवार सुबह 10:50 बजे वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, जिसके साथ ही बिहार की सत्ता में एक नया अध्याय शुरू होगा। राज्य को उसका अगला मुख्यमंत्री मिल गया है और इस ऐलान के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं उनके राजनीतिक सफर पर, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर
सम्राट चौधरी बीजेपी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो आरएसएस की पारंपरिक पृष्ठभूमि से नहीं आते, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और रणनीतिक कौशल के दम पर पार्टी में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी राजनीति की जड़ें उनके परिवार से जुड़ी हुई हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं। वे समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और समय-समय पर कई बड़े राजनीतिक दलों के साथ जुड़े रहे। शकुनी चौधरी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा। वे कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे, तो कभी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में भी सक्रिय भूमिका निभाई। कुशवाहा समाज में उनकी मजबूत पकड़ और वर्षों का राजनीतिक अनुभव सम्राट चौधरी के लिए एक मजबूत आधार बना। यही वजह है कि सम्राट चौधरी को राजनीति में एक मजबूत विरासत मिली, जिसने उनके सफर को दिशा दी।
सम्राट चौधरी ने साल 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने संगठन में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई। बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के अनुसार, 1995 में एक राजनीतिक मामले में उन्हें 89 दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा, जो उनके संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन का हिस्सा रहा। उनकी चुनावी यात्रा की बात करें तो साल 2000 में उन्होंने परबत्ता विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में एंट्री की। हालांकि, 2005 के चुनाव में उन्हें जेडीयू के रामानंद सिंह से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2010 में एक बार फिर इसी सीट से जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। 2014 का साल उनके करियर में एक अहम मोड़ लेकर आया। लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया। उस समय सम्राट चौधरी ने मांझी का समर्थन किया और उन्हें नगर विकास विभाग का मंत्री भी बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने आरजेडी से इस्तीफा देकर जेडीयू का दामन थाम लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर यहीं नहीं रुका। साल 2017 में उन्होंने जेडीयू से भी अलग होकर बीजेपी का रुख किया। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। संगठन में उनकी सक्रियता और रणनीतिक समझ के चलते उन्हें मार्च 2023 में बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2024 में बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ, जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाई। इस सरकार में सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की जीत के बाद सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना उनके लंबे राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है।
चिराग पासवान ने दी बधाई, बोले- ‘नई ऊंचाइयों पर जाएगा बिहार’
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए सम्राट चौधरी को ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में बिहार अगले पड़ाव की ओर जाएगा और नई ऊंचाइयों को छुएगा। पासवान ने कहा, “वो मेरे बिहार को अगले पड़ाव की ओर लेकर जाने वाले हैं। बिहार यहां से नई ऊंचाइयों पर सम्राट चौधरी के नेतृत्व में जाएगा, ऐसा मेरा विश्वास है।”
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
नीतीश कुमार की भूमिका और आगे का रास्ता
चिराग पासवान ने नीतीश कुमार की पिछली भूमिका को भी याद किया, जहां उन्होंने बिहार को ‘जंगलराज’ के दौर से निकालकर स्थिर परिस्थितियों में लाने का काम किया था। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार उनके कार्यों को आगे बढ़ाएगी। पासवान ने जोर देकर कहा कि जिस तरह नीतीश कुमार ने बिहार को जंगलराज से बाहर निकाला, उसी तरह सम्राट चौधरी के नेतृत्व में उनकी सरकार इन कार्यों को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने नीतीश कुमार को केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की राज्य में मौजूदगी और सक्रियता को जरूर याद किया जाएगा। बिहार राजनीति में यह बदलाव काफी अहम है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
एनडीए नेताओं की उम्मीदें
यह बयान बिहार में एनडीए सरकार में सत्ता हस्तांतरण के दौरान आया है। कई एनडीए नेताओं ने सम्राट चौधरी को बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में राज्य में विकास, सुशासन और स्थिरता की गति तेज होगी। यह बिहार राजनीति के लिए एक नया अध्याय होगा। माना जा रहा है कि बुधवार को वे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
नई सरकार का गठन और शपथ ग्रहण
नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देकर सत्ता की कमान नए नेतृत्व को सौंपने का रास्ता साफ कर दिया। करीब दो दशक तक सत्ता में रहने के बाद नीतीश कुमार ने अपनी कैबिनेट की अंतिम बैठक में भाग लिया और उसके बाद राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। इस्तीफे की इस प्रक्रिया के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। इस्तीफे के तुरंत बाद एनडीए में नए नेतृत्व को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई। पहले भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया। इस बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके नाम का समर्थन किया, जिससे पार्टी में एकजुटता का संदेश गया। बैठक में पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री रेणु देवी और विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने समर्थन दिया। इसके बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान ने औपचारिक रूप से सम्राट चौधरी के नेता चुने जाने की घोषणा की।
इसके बाद एनडीए विधानमंडल दल की संयुक्त बैठक विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित की गई। इस बैठक में नीतीश कुमार भी मौजूद रहे और उन्होंने ही औपचारिक रूप से सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता घोषित किया। मंच पर कई प्रमुख नेता उपस्थित थे, जिनमें केंद्रीय मंत्री एवं जदयू के नेता राजीव रंजन सिंह ललन सिंह, जीतन राम मांझी, रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। बैठक के दौरान माहौल उत्साहपूर्ण रहा और नीतीश कुमार ने विधायकों से तालियों के साथ सम्राट चौधरी के नेतृत्व का स्वागत करने का आग्रह किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पूरे हॉल में नई सरकार के गठन को लेकर सकारात्मक माहौल देखने को मिला। नेताओं का मानना है कि यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नई दिशा तय करेगा। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भूमिका रही। वहीं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ललन सिंह और अन्य एनडीए सहयोगी दलों के नेताओं ने भी सरकार गठन की प्रक्रिया में भागीदारी निभाई।
अब सभी की नजरें बुधवार सुबह 10:50 बजे लोक भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं, जहां सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। माना जा रहा है कि यह समारोह बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में दर्ज होगा। नई सरकार के गठन के साथ राज्य में विकास और प्रशासनिक नीतियों को लेकर भी नई दिशा की उम्मीद जताई जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






