Supreme Court Vehicle Insurance: देश की सर्वोच्च अदालत ने बिना थर्ड-पार्टी बीमा के चल रही गाड़ियों पर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत जिन वाहनों का वैध थर्ड-पार्टी बीमा नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह फैसला सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
Bihar Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करे, जिसके तहत बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन न मिले। इस फैसले का सीधा असर बिहार सहित पूरे देश के वाहन मालिकों पर पड़ेगा। जज संजय करोल और जज प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने यह भी कहा कि नए वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि बढ़ाई जाए।






क्यों लिया सुप्रीम कोर्ट ने यह बड़ा फैसला?
अदालत ने इस सख्त कदम के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हुए पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता और उन्हें न्याय के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने बताया कि देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के हैं। यह आंकड़ा करीब 16.54 करोड़ गाड़ियों का है, जबकि कुल रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या लगभग 30.48 करोड़ है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन इसका सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है।
“अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर उचित मुआवजा दिलाना है, ताकि उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।”
कैसे लागू होगी ‘नो फ्यूल’ व्यवस्था और नए बीमा नियम?
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियामक IRDAI और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाने को कहा है, जिससे वाहन के बीमा की स्थिति की जांच के बाद ही ईंधन उपलब्ध कराया जा सके। इस प्रक्रिया में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का उपयोग करने का सुझाव भी दिया गया है। अदालत का मानना है कि अगर बिना बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा तो ऐसे वाहनों की पहचान आसान होगी और मालिक भी समय पर बीमा करवाने के लिए प्रेरित होंगे। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई है।
इसके साथ ही, अदालत ने 2018 के अपने पुराने आदेश में बदलाव करते हुए नए वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि बढ़ा दी है।
- नई कारों के लिए: अब 4 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा (पहले 3 साल था)।
- नए दोपहिया वाहनों के लिए: अब 6 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा (पहले 5 साल था)।
IRDAI को इस संबंध में तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है। राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल उपकरण या ऐप उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे वे मौके पर ही वाहन के बीमा की स्थिति जांच सकें और नियम तोड़ने वालों पर ई-चालान जारी कर सकें। इसके अतिरिक्त, ANPR कैमरों को बीमा सूचना ब्यूरो और वाहन पोर्टल के आंकड़ों से जोड़कर बिना बीमा वाले वाहनों पर स्वतः ई-चालान जारी करने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है।
यह पहल सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बीमा कवरेज का दायरा बढ़ेगा और सड़कों पर बिना बीमा के चलने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी।
16 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बिना बीमा के: सुप्रीम कोर्ट की चिंता
जज संजय करोल और जज प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने इस गंभीर समस्या पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। अदालत ने अपने आदेश में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया है कि देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। यह संख्या करीब 16.54 करोड़ गाड़ियों की है, जबकि देश में कुल रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या लगभग 30.48 करोड़ है।
अदालत ने कहा, “मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन इसका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। अगर बिना बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं मिलेगा तो ऐसे वाहनों की पहचान आसान होगी और गाड़ी मालिक भी समय पर बीमा करवाने के लिए प्रेरित होंगे।”
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियामक IRDAI और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें वाहन के बीमा की स्थिति की जांच के बाद ही फ्यूल उपलब्ध कराया जाए। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
पायलट प्रोजेक्ट कैसे होगा लागू? नए नियम और तकनीक
अदालत ने ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का उपयोग करने का सुझाव भी दिया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 के अपने पुराने आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें नई कारों के लिए तीन वर्ष और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा खरीदना जरूरी किया गया था। अब इस अवधि को बढ़ा दिया गया है।
- नई कारों के लिए: अब 4 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा।
- नए दोपहिया वाहनों के लिए: अब 6 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा।
IRDAI को इस संबंध में तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है। राज्य पुलिस को भी ऐसे मोबाइल उपकरण या ऐप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, जिनकी मदद से वे मौके पर ही वाहन के बीमा की स्थिति की जांच कर सकें और नियम तोड़ने वालों पर ई-चालान जारी कर सकें।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि ANPR कैमरों को बीमा सूचना ब्यूरो और वाहन पोर्टल के आंकड़ों से जोड़कर बिना बीमा वाले वाहनों पर स्वतः ई-चालान जारी करने की व्यवस्था की जाए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और टोल प्लाजा पर लंबी कतारों की समस्या को देखते हुए, कुछ रास्तों पर ऐसा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को भी कहा गया है, जहां गाड़ियों को टोल पर रोके बिना ऑटोमैटिक सिस्टम से उनकी पहचान कर टैक्स वसूला जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सड़क सुरक्षा और पीड़ितों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर उचित मुआवजा दिलाना है, ताकि उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।








