Bihar Jeevika Haat: बिहार की बिहार में सम्राट चौधरी सरकार जीविका दीदियों को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब सुधा आउटलेट की तर्ज पर राज्यभर में ‘जीविका हाट’ बनाए जाएंगे, जहां जीविका दीदियों के हाथों से बने उत्पाद एक ही जगह पर ग्राहकों को उपलब्ध होंगे। ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को इस महत्वपूर्ण परियोजना की घोषणा की। राज्य में कुल 203 ऐसे ग्रामीण हाट स्थापित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है, जिसके लिए स्थलों का चयन भी कर लिया गया है।
एक छत के नीचे मिलेगी मार्केटिंग की सुविधा
मंत्री श्रवण कुमार ने पटना स्थित पुराना सचिवालय में जीविका और वीबी जी रामजी योजना की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन ग्रामीण हाट में जीविका दीदियों के उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग की व्यवस्था एक ही छत के नीचे होनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि जीविका दीदियों के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं आनी चाहिए।






मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘इन ग्रामीण हाट में जीविका दीदियों के उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग की व्यवस्था एक ही छत के नीचे होनी चाहिए।’
बैठक में बताया गया कि बिहार के सभी 203 स्थलों का चयन जीविका हाट के निर्माण के लिए कर लिया गया है। नालंदा सहित कुछ जिलों से अंतिम प्रस्ताव मिल चुके हैं, जबकि अन्य जिलों से भी प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन जिलों से अभी तक प्रस्ताव नहीं मिले हैं, उनकी भी समीक्षा की जाए।
जीविका हाट में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
श्रवण कुमार ने जीविका हाट में उपलब्ध होने वाली सुविधाओं का भी विस्तृत ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि इन हाटों में स्टोरेज रूम, दुकानें, बिक्री के लिए शेड, शौचालय और आधुनिक सुविधाओं से युक्त कार्यालय का निर्माण किया जाएगा। पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के लिए मॉडल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार कर ली गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में नाबार्ड का भी सहयोग लिया जा रहा है। जल्द ही चयनित जगहों पर जीविका हाट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण हाट बनाने के लिए सबसे पहले नालंदा जिले से प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिस पर मंत्री ने तत्काल काम शुरू करने का निर्देश दिया है।
रोजगार के अवसर और जीडीपी में योगदान
श्रवण कुमार ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण हाट के निर्माण से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि यह परियोजना खास तौर पर जीविका दीदियों को उनके उत्पादों के लिए एक तैयार बाजार उपलब्ध कराएगी। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि बिहार की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी महत्वपूर्ण योगदान बढ़ेगा।
श्रवण कुमार ने कहा कि ‘ग्रामीण हाट के निर्माण से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खास तौर पर जीविका दीदियों को अपने उत्पादों के लिए तैयार बाजार उपलब्ध होगा। इससे बिहार की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में भी योगदान बढ़ेगा।’
यह पहल बिहार में सहकारी दुग्ध उत्पादक कॉम्फेड द्वारा संचालित सुधा के नेटवर्क के समान है, जहां सुधा दूध, दही और पनीर जैसे उत्पाद मिलते हैं। जिस तरह राज्य सरकार ने गांव-गांव में सुधा आउटलेट खोलने का लक्ष्य रखा है, उसी तर्ज पर अब गांवों में जीविका हाट तैयार किए जा रहे हैं, जो ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।








