Samastipur Weather News: समस्तीपुर जिले में मॉनसून के आगमन से पहले मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने 13 जून 2026 के लिए अपनी विस्तृत मौसम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में तापमान, सापेक्ष आर्द्रता, हवा की गति और दिशा जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है, जो किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए उपयोगी है।
विश्वविद्यालय के जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 13 जून को अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.4 डिग्री कम है। वहीं, न्यूनतम तापमान 25.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.5 डिग्री कम है। तापमान में यह मामूली गिरावट लोगों को थोड़ी राहत दे सकती है, लेकिन हवा में नमी और उमस अभी भी बनी हुई है, जिससे असहजता का अनुभव हो रहा है।
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सुबह 7 बजे सापेक्ष आर्द्रता 79 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि दोपहर 2 बजे यह 68 प्रतिशत थी। उच्च आर्द्रता का स्तर हवा में नमी की अधिकता को दर्शाता है, जिससे चिपचिपी गर्मी का अनुभव हो सकता है। वाष्पोतसर्जन की दर 4.8 मिलीमीटर रही, जो पौधों से पानी के वाष्पीकरण की दर को इंगित करती है और यह कृषि गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
हवा की गति 3.9 किलोमीटर प्रति घंटा मापी गई और इसकी दिशा पुरवा (पूर्वी) रही। पूर्वी हवाएं अक्सर मॉनसून के आगमन का संकेत देती हैं और बिहार के मैदानी इलाकों में नमी लाती हैं। हालांकि, पिछले 24 घंटों में कोई वर्षा दर्ज नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मॉनसून की सक्रियता अभी इस क्षेत्र में पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, लेकिन परिस्थितियाँ अनुकूल बन रही हैं।
मौसम में बदलाव और किसानों पर असर
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी हवाओं के साथ बढ़ती आर्द्रता किसानों के लिए धान की नर्सरी तैयार करने और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई की योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इस समय मिट्टी की नमी को बनाए रखना और सही समय पर बुवाई करना उपज के लिए बेहद जरूरी है। यह देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Bihar Weather Forecast को भी प्रभावित करेगा, जिसमें आने वाले दिनों में बदलाव की संभावना है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा लगातार मौसम संबंधी आंकड़े जारी कर किसानों को जागरूक करता रहा है। मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मिट्टी की नमी की जांच करें और बुवाई से पहले खेत तैयार करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएं। सब्जियों और अन्य जल्दी पकने वाली फसलों के लिए सिंचाई की आवश्यकता पर भी ध्यान देना जरूरी है, खासकर जब तक नियमित मॉनसूनी बारिश शुरू न हो जाए।
विश्वविद्यालय का जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र न केवल मौसम की भविष्यवाणी करता है बल्कि इसके कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों का भी अध्ययन करता है। उनकी रिपोर्टें स्थानीय किसानों के लिए एक भरोसेमंद मार्गदर्शक का काम करती हैं, जिससे उन्हें अपनी फसल चक्र को मौसम के अनुसार ढालने में मदद मिलती है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच किसानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में समस्तीपुर और आसपास के क्षेत्रों में मॉनसून पूर्व की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जो गर्मी से थोड़ी राहत दिला सकती है। हालांकि, व्यापक मॉनसूनी वर्षा के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है, जिससे किसानों को धैर्य रखने की सलाह दी जाती है।
तापमान में उतार-चढ़ाव और आर्द्रता का उच्च स्तर जारी रहने की उम्मीद है। ऐसे में आम लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। लू और उमस भरी गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने तथा सीधे धूप के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता है।
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स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग भी किसानों को मौसम के अनुरूप सलाह दे रहे हैं। उन्हें सलाह दी गई है कि वे अपने मोबाइल पर मौसम अपडेट्स पर नजर रखें और आकस्मिक योजनाओं के लिए तैयार रहें। खासकर, तेज हवाओं और संभावित वज्रपात से बचाव के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है, क्योंकि मॉनसून पूर्व की अवधि में ऐसी घटनाएं आम हो सकती हैं।
मौसम का यह मिजाज दिखाता है कि मॉनसून बिहार के करीब है, लेकिन अभी भी पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है। यह समय किसानों के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने और आम नागरिकों के लिए बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने का है। सभी को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक मौसम पूर्वानुमानों पर ध्यान दें और अनावश्यक अफवाहों से बचें।







