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भारतीय रुपया: डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट, क्या और गिरेगा दाम?

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Indian Rupee: मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय रुपया अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं। गोल्डमैन सैक्स जैसी प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थाओं ने तो यहां तक कह दिया है कि आने वाले समय में रुपये की स्थिति और बिगड़ सकती है, जो आयातकों और आम नागरिकों दोनों पर सीधा असर डालेगा।

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# भारतीय रुपया: डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट, क्या और गिरेगा दाम?

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## भारतीय रुपया: गिरावट के प्रमुख कारण और आरबीआई की भूमिका

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पिछले महीने में ही रुपये में करीब 1.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बाजार में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है ताकि रुपये पर दबाव कम हो सके। बाजार के जानकारों के अनुसार, आरबीआई ने पिछले एक ही हफ्ते में करीब 18 से 20 अरब डॉलर की बिक्री की है, जो रुपये को स्थिर करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मार्च महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 5.5 अरब डॉलर की इक्विटी निकाल ली, जिससे निफ्टी 50 में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आई। 17 मार्च को रुपया डॉलर के मुकाबले 92.41 के स्तर पर पहुंच गया था, और पिछले 12 महीनों में इसमें लगभग 6.75 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह अपने ऑल-टाइम लो 92.46 पर बंद हुआ, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

गोल्डमैन सैक्स के भारतीय अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने रुपये के 95 प्रति डॉलर तक गिरने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान मुख्य रूप से अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित बंद होने और भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) में बढ़ोतरी की आशंका पर आधारित है। यदि यह भविष्यवाणी सच होती है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जो रुपये पर और दबाव डाल रहा है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, और बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर व्यापार घाटे को बढ़ाती हैं, जिससे रुपये की कीमत और कमजोर होती है। ऐसे में, सरकार और आरबीआई दोनों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे कैसे आर्थिक स्थिरता बनाए रखें। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

## आर्थिक वृद्धि दर पर असर और महंगाई की आशंका

गोल्डमैन सैक्स का यह भी मानना है कि रुपये की इस गिरावट का असर भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर भी पड़ सकता है। संस्था ने अपने पूर्व अनुमान में संशोधन करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर को 7.0 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, महंगाई दर में 30 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, जबकि चालू खाता घाटा (CAD) 0.8 प्रतिशत बढ़कर जीडीपी के 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

यह स्थिति न केवल आयातित वस्तुओं को महंगा करेगी, बल्कि विदेशी निवेश को भी प्रभावित कर सकती है। निर्यातकों को हालांकि कुछ फायदा मिल सकता है, लेकिन समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार और केंद्रीय बैंक को इस चुनौती से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि देश की आर्थिक स्थिरता बनी रहे और आम जनता पर इसका बोझ कम हो।

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