Delhi High Court: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी कैमरे अनिवार्य करने की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों को ड्यूटी के दौरान बॉडी कैमरे पहनना अनिवार्य नहीं होगा। इसके बजाय, कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है। यह फैसला बुधवार को सुनाया गया, जिसमें सुरक्षा बलों की जवाबदेही और विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन को लेकर एक नई दिशा तय की गई है।
बॉडी कैमरे की अनिवार्यता से इनकार, SOP पर जोर
दिल्ली हाई कोर्ट ने सीधे तौर पर बॉडी कैमरे अनिवार्य करने से इनकार करते हुए, सरकार को एक विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) बनाने का निर्देश दिया है। इस एसओपी में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल की तैनाती, भीड़ नियंत्रण के तरीके और सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा। अदालत का मानना है कि केवल कैमरे अनिवार्य करने से अधिक महत्वपूर्ण एक स्पष्ट और प्रभावी कार्यप्रणाली का होना है। यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो पुलिस कार्रवाई को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों का समाधान कर सकता है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों का संदर्भ और नई गाइडलाइन
नई दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। यहां अक्सर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित होते हैं, जिनमें दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बॉडी कैमरों की अनिवार्यता की मांग अक्सर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच संभावित टकराव की स्थिति में जवाबदेही और साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से उठाई जाती रही है। हाई कोर्ट का यह फैसला बताता है कि अदालत ने इस मुद्दे पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें केवल तकनीकी समाधान की बजाय प्रक्रियात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
आगे क्या होगा? सरकार की जिम्मेदारी
अब सरकार पर यह जिम्मेदारी होगी कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशानुसार जल्द से जल्द एक प्रभावी एसओपी तैयार करे। यह एसओपी न केवल सुरक्षाकर्मियों के कर्तव्यों को परिभाषित करेगी, बल्कि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए भी दिशानिर्देश तय करेगी। इस फैसले का दूरगामी असर जंतर-मंतर पर होने वाले भविष्य के प्रदर्शनों और पुलिस की भूमिका पर पड़ सकता है, जिससे विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अधिक स्पष्टता और निष्पक्षता आने की उम्मीद है।







