P Chidambaram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तीखा पलटवार किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताने पर गर्व व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री के बयान पर कटाक्ष किया। उन्होंने यह टिप्पणी 16 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की अपील के एक दिन बाद की है।
PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर भड़के चिंदबरम, बोले- ‘मुझे गर्व है!’
P Chidambaram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिंदबरम ने करारा जवाब दिया है। नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, चिंदबरम ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें ‘गर्व है कि वे दिमागी नक्सल हैं’। यह बयान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए भाषण के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘दशकों तक सत्ता में रहे ये दिमागी नक्सली अब मौके की तलाश में हैं और अराजकता के नए रास्ते खोज रहे हैं।’ उन्होंने समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए ‘भांति-भांति के दांव’ चलने का आरोप लगाया था।
पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी और चिंदबरम का पलटवार
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘हत्यारी नक्सलियों’ को समाप्त करने में देश की सफलता का जिक्र करते हुए कहा था कि अब ‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानकर उन्हें अलग-थलग करने की आवश्यकता है। यह टिप्पणी कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं पर निशाना साधते हुए मानी जा रही थी। पी चिंदबरम ने इसी बयान पर सीधा पलटवार करते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया और इस पर गर्व व्यक्त किया।
मुझे गर्व है कि मैं ‘दिमागी नक्सल’ हूं।
पी चिंदबरम, कांग्रेस नेता
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस
प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान और पी चिंदबरम के इस पर दिए गए जवाब ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे सरकार की आलोचना करने वालों को चुप कराने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे देश विरोधी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में पेश कर रहा है। चिंदबरम का यह बयान इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को और तेज कर सकता है।
आगे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, जिससे देश की राजनीति में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का उपयोग और इसकी परिभाषा पर गरमागरम बहस छिड़ सकती है।
प्रधानमंत्री ने लाल किले से दी थी ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की चेतावनी
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सलियों’ के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। उन्होंने कहा था कि दशकों तक सत्ता में रहे ये ‘दिमागी नक्सली’ अब नए अवसर तलाश रहे हैं और अराजकता फैलाने के नए रास्ते खोज रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग समाज को गलत रास्ते पर धकेलने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा, ‘देश को हत्यारी नक्सलियों को समाप्त करने में सफलता मिली है। अब समय आ गया है कि हम इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानें और उन्हें समाज से अलग-थलग करें।’ यह बयान देश में राजनीतिक हलकों में एक नई बहस का विषय बन गया है।
पी चिदंबरम का सीधा हमला: ‘मुझे गर्व है कि मैं दिमागी नक्सल हूं’
प्रधानमंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने 16 अगस्त को ‘X’ पर लिखा:
‘मुझे गर्व है कि मैं ‘दिमागी नक्सल’ हूं। वे (प्रधानमंत्री) मुझे और उन सभी को जो उनकी सरकार की नीतियों और कार्यों पर सवाल उठाते हैं, ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं। मुझे गर्व है!’
चिदंबरम का यह बयान प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले आरोपों को सीधे तौर पर चुनौती देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और उनके जैसे अन्य लोग, जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं, प्रधानमंत्री की नजर में ‘दिमागी नक्सल’ हो सकते हैं, और उन्हें इस पर गर्व है। यह टिप्पणी देश की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे सकती है और आने वाले दिनों में इस पर और भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।







