Bihar Education: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण को लेकर शिक्षा विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत आयोजित होने वाले सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया है। अब ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से टैग किए गए सभी शिक्षकों को इन प्रशिक्षणों में अनिवार्य रूप से भाग लेना होगा।
अनिवार्य उपस्थिति और कार्रवाई के निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ-एसएसए) को पत्र लिखकर स्पष्ट आदेश दिए हैं। उन्हें अपने क्षेत्र के शिक्षकों की प्रशिक्षण में 100 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। यदि कोई शिक्षक किसी अपरिहार्य परिस्थिति के कारण प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो पाता है, तो उसे सक्षम प्राधिकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना पूर्व अनुमति के गैरहाजिर रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को ऐसी कार्रवाई की रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।
लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय
निदेशक ने चेतावनी दी है कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में किसी भी प्रकार की ढिलाई, उदासीनता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित डीईओ और डीपीओ की जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शिक्षकों की गैर-मौजूदगी से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और शिक्षकों की क्षमता वृद्धि बाधित हो रही है।
विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है, “यदि प्रशिक्षण में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में किसी भी प्रकार की शिथिलता, उदासीनता या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित डीईओ और डीपीओ की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके खिलाफ भी आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।”
पूर्व में भी हुई थी अनदेखी
पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि 2026-27 तक के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान कई जिलों में पूर्व निर्धारित शेड्यूल के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो रहे हैं। इससे प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है और शिक्षकों के व्यावसायिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पहले भी अनुपस्थित शिक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई जिलों से अपेक्षित कार्रवाई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। इसे प्रशासनिक उदासीनता मानते हुए शिक्षा परिषद ने एक बार फिर सख्त निर्देश जारी किए हैं, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।







