

Aaj Ka Panchang: पवित्र माघ मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर, जब प्रकृति भी एक नई ऊर्जा से ओतप्रोत होती है, तब आध्यात्मिकता का पर्व गुप्त नवरात्र आज से प्रारंभ हो रहा है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, 19 जनवरी 2026, सोमवार का यह पावन दिवस माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को चिह्नित करता है। आज के दिन से उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग के मंगलकारी संयोग में गुप्त नवरात्र का भव्य शुभारंभ हो गया है। यह साधना का विशेष काल कलश स्थापना के साथ आरंभ होकर 28 जनवरी को विजयादशमी के शुभ अवसर पर संपन्न होगा। इस नौ दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा के दौरान, मां दुर्गा के गुप्त स्वरूपों की आराधना की जाएगी, जो साधकों को विशेष सिद्धियां और मनोवांछित फल प्रदान करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आज घर-घर में और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ शक्ति उपासना का विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसमें देवी के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। यह समय गुप्त साधनाओं और तंत्र-मंत्र की विद्याओं के लिए अत्यंत ही फलदायी माना जाता है, जब ग्रहों की स्थिति भी अनेक शुभ योगों का निर्माण करती है।
Aaj Ka Panchang 19 जनवरी: गुप्त नवरात्रि की कलश स्थापना और उपासना विधि
गुप्त नवरात्रि की कलश स्थापना एक पवित्र अनुष्ठान है जो देवी शक्ति के आह्वान के लिए किया जाता है। इसकी विधि अत्यंत श्रद्धा और नियमानुसार संपन्न की जानी चाहिए:
- सुबह स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें।
- चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें।
- मिट्टी के कलश (घट) में जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत (साबुत चावल), लौंग का जोड़ा और इलायची डालें।
- कलश के मुख पर अशोक या आम के पांच पत्ते लगाकर उस पर एक ढक्कन रखें।
- ढक्कन में चावल भरकर उस पर एक नारियल स्थापित करें। नारियल पर लाल चुनरी लपेट दें।
- कलश को चावलों के ऊपर स्थापित करें और उसके चारों ओर जौ बोएं।
- मां दुर्गा का ध्यान करते हुए दीप प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती दिखाएं।
- संकल्प लें और नौ दिनों तक व्रत का पालन करने का निश्चय करें।
कलश स्थापना का शुभ समय
माघ शुक्ल प्रतिपदा का यह पूरा दिन कलश स्थापना के लिए अत्यंत शुभ है, विशेषकर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में। इस मंगलकारी समय में की गई स्थापना विशेष फलदायी होती है।
गुप्त नवरात्रि का महत्व और फल
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र साधना और गुप्त विद्याओं के लिए समर्पित होती है। इन नौ दिनों में देवी के महाविद्या स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में की गई पूजा और साधना का फल शीघ्र प्राप्त होता है और यह साधक की हर मनोकामना पूर्ण करती है। यह काल आत्मशुद्धि और आंतरिक शक्ति को जागृत करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महादेव मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।
निष्कर्ष एवं उपाय
गुप्त नवरात्रि के इन पावन दिनों में देवी की उपासना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन मां दुर्गा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। माता रानी की कृपा से आपका जीवन मंगलमय होगा।
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