
Chaitra Amavasya 2026: चैत्र मास की अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, यह दिन पितरों की शांति और कुंडली में मौजूद विभिन्न दोषों के निवारण हेतु अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस पवित्र तिथि को भूतड़ी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यदि किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष विद्यमान है, तो चैत्र अमावस्या का दिन इसके दुष्प्रभाव को कम करने और इससे मुक्ति पाने के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन किए गए अनुष्ठान और उपाय त्वरित फल प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए, ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार जानते हैं कि इस विशेष दिन पर किन उपायों को करना चाहिए, जिससे जीवन में शांति और समृद्धि का आगमन हो सके। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
चैत्र अमावस्या 2026: कालसर्प दोष के निवारण हेतु करें ये अचूक उपाय
चैत्र अमावस्या 2026: क्या है इसका महत्व और कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय?
कालसर्प दोष निवारण के विशेष उपाय
इस अमावस्या पर कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं:
- पितृ तर्पण एवं श्राद्ध: चैत्र अमावस्या पितरों को समर्पित होती है। इस दिन विधि-विधान से पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितृ दोष के साथ-साथ कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव भी शांत होते हैं। जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- नाग-नागिन पूजा: चांदी के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा कर उन्हें बहते जल में प्रवाहित करना कालसर्प दोष के निवारण हेतु एक प्रभावी उपाय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह भगवान शिव को प्रसन्न करने और राहु-केतु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक होता है।
- शिवलिंग पर जलाभिषेक: इस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए रुद्राभिषेक करना भी बहुत फलदायी माना जाता है।
- गरीबों को दान: अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। दान करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
- हनुमान चालीसा का पाठ: नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना कालसर्प दोष के प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- पीपल के वृक्ष की पूजा: अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करना और दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। पीपल में त्रिदेवों का वास माना जाता है।
चैत्र अमावस्या का महत्व
चैत्र अमावस्या को हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष की पहली अमावस्या माना जाता है, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। यह तिथि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन स्नान, दान और पितृ तर्पण से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए शांति और मोक्ष की कामना करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ज्योतिषाचार्य सदानंद झा के अनुसार उपाय
ज्योतिषाचार्य श्री झा बताते हैं कि इस दिन विशेष रूप से उन लोगों को उपाय करने चाहिए जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष प्रबल हो। इन उपायों से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
निष्कर्ष
चैत्र अमावस्या 2026 एक ऐसा पुण्यकारी अवसर है जब हम अपने पितरों को स्मरण कर सकते हैं और अपनी कुंडली के दोषों, विशेषकर कालसर्प दोष को शांत करने के लिए आध्यात्मिक उपाय कर सकते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये उपाय निश्चित रूप से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं।







