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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर आज से नववर्ष 2083 का शुभ आरंभ और मां दुर्गा की आराधना, घटस्थापना का पावन पर्व

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Chaitra Navratri 2026: आने वाले 19 मार्च, 2026 से चैत्र नवरात्र और नवसंवत्सर 2083 का दिव्य शुभारंभ हो रहा है, जो नौ दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा की अनवरत आराधना का महापर्व है। यह समय सनातन धर्म में अत्यंत पावन और ऊर्जा से परिपूर्ण माना गया है, जब प्रकृति भी नए रंगों और जीवन से भर उठती है।

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चैत्र नवरात्रि 2026: नववर्ष 2083 का शुभ आरंभ और मां दुर्गा की आराधना

चैत्र नवरात्रि 2026: घटस्थापना का पावन पर्व

आज 19 मार्च, 2026 से चैत्र नवरात्र और नवसंवत्सर 2083 का दिव्य शुभारंभ हो रहा है, जो नौ दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा की अनवरत आराधना का महापर्व है। यह समय सनातन धर्म में अत्यंत पावन और ऊर्जा से परिपूर्ण माना गया है, जब प्रकृति भी नए रंगों और जीवन से भर उठती है। इस पवित्र काल में देवी के नौ स्वरूपों की उपासना से साधक आध्यात्मिक बल और लौकिक सुख दोनों प्राप्त करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी के साथ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 भी प्रारंभ हो जाएगा, जो कि भारतीय संस्कृति में एक विशेष महत्व रखता है। यह पर्व जीवन में नई उमंग और सकारात्मकता का संचार करता है।

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पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत शुभ घटस्थापना के साथ होती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और संकल्प लिया जाता है।

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  • सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध करें और एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
  • चावल की छोटी ढेरी बनाकर उस पर मिट्टी का कलश स्थापित करें।
  • कलश में जल भरकर उसमें कुछ सिक्के, सुपारी, अक्षत, लौंग और इलायची डालें।
  • कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखकर उस पर नारियल रखें, जिसे लाल चुनरी से लपेटा गया हो।
  • कलश के चारों ओर जौ बोकर मिट्टी के पात्र में रखें। यह समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • गणेश जी और मां दुर्गा का आह्वान करें।
  • नौ दिनों तक प्रतिदिन दीपक प्रज्वलित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

चैत्र नवरात्रि के प्रमुख तिथियां:

  • चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ: 19 मार्च, 2026
  • नवसंवत्सर 2083 का आरंभ: 19 मार्च, 2026
  • विनायक चतुर्थी व्रत: 22 मार्च, 2026

पर्व का महत्व और विनायक चतुर्थी का संयोग

यह नौ दिवसीय पर्व मां दुर्गा की शक्ति और उनके विभिन्न रूपों को समर्पित है। इन दिनों में उपवास रखने और विशेष पूजा-अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी अवधि में, 22 मार्च, 2026 को विनायक चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा, जो भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ है। यह संयोग भक्तों के लिए दोहरी कृपा प्राप्त करने का अवसर लेकर आएगा।

मां दुर्गा का महामंत्र

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥

निष्कर्ष और उपकार

चैत्र नवरात्रि का यह पावन पर्व हमें आत्मचिंतन और शुद्धि का अवसर प्रदान करता है। इन नौ दिनों में देवी माँ की सच्चे मन से आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। माँ दुर्गा अपने भक्तों पर सदैव कृपा बरसाती हैं। इस अवधि में दान-पुण्य करना और गरीब व जरूरतमंदों की सहायता करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/

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