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गुड़ी पड़वा 2026: नूतन वर्ष का आध्यात्मिक आरंभ और शुभ अनुष्ठान

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Gudi Padwa 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा पर्व हिंदू धर्म में नूतन वर्ष के आगमन का प्रतीक है। यह महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है, जहाँ इस दिन घरों में गुड़ी स्थापित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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गुड़ी पड़वा 2026: नूतन वर्ष का आध्यात्मिक आरंभ और शुभ अनुष्ठान

गुड़ी पड़वा 2026: शुभ मुहूर्त और स्थापना विधि

हिंदू धर्म में गुड़ी पड़वा का पर्व नव संवत्सर के आरंभ का द्योतक है। यह वह पावन शुभ तिथि है जब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की थी। इस दिन घरों में विजय पताका के रूप में गुड़ी स्थापित की जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत और समृद्धि का प्रतीक है। यह पर्व मुख्यतः महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, यह पवित्र पर्व शुक्रवार, 20 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है, क्योंकि इस अवसर पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भक्तगण विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आह्वान करते हैं।

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गुड़ी पड़वा 2026: पूजन विधि

गुड़ी पड़वा के दिन निम्नलिखित विधि से पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है:

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  • सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें और स्वच्छ नवीन वस्त्र धारण करें।
  • घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों और गेंदे के फूलों से सजाएं, जो शुद्धता और शुभता का प्रतीक है।
  • घर के उत्तर-पूर्व दिशा में एक साफ-सुथरी जगह का चुनाव करें।
  • उस स्थान पर एक सुंदर चौकी स्थापित करें और उसे लाल या पीले रंग के नवीन वस्त्र से सुशोभित करें।
  • एक नए, चमकदार बांस की छड़ी को अच्छी तरह धोकर हल्दी-कुमकुम से सजाएं।
  • इस छड़ी पर एक नया रेशमी वस्त्र, नीम के ताजे पत्ते, आम के पल्लव, फूलों की माला और मिश्री या बताशे की गांठ बांधें।
  • एक तांबे या चाँदी के कलश को जल से भरकर उस पर नारियल रखें और उसे चौकी पर स्थापित करें।
  • सजी हुई गुड़ी को कलश के पास सावधानीपूर्वक खड़ा करें। यह विजय और नववर्ष के आगमन का प्रतीक है।
  • भगवान ब्रह्मा और विष्णु का ध्यान करते हुए धूप, दीप, अगरबत्ती और नैवेद्य अर्पित करें।
  • पारंपरिक व्यंजन जैसे पूरन पोली, श्रीखंड, या मीठे चावल का भोग लगाएं।
  • पूजन के उपरांत, परिवार के सभी सदस्य नीम के पत्तों और गुड़ का सेवन करें, जो निरोगी काया और मधुर जीवन का सूचक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

गुड़ी पड़वा 2026: शुभ मुहूर्त

तिथिदिनप्रतिपदा तिथि आरंभप्रतिपदा तिथि समाप्तगुड़ी स्थापना मुहूर्त
20 मार्च 2026शुक्रवार19 मार्च 2026, रात 11:39 बजे20 मार्च 2026, रात 11:06 बजेसुबह 06:29 बजे से 10:29 बजे तक

गुड़ी स्थापना के लिए सूर्योदय के तुरंत बाद का समय अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुड़ी पड़वा का आध्यात्मिक महत्व

गुड़ी पड़वा का पर्व केवल एक नए वर्ष का आरंभ नहीं, अपितु यह आध्यात्मिक उत्थान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का भी प्रतीक है। इस दिन महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में नव संवत्सर का आरंभ होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने इसी दिन बालि का वध कर दक्षिण भारत के लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी, जिसकी विजय पताका के रूप में गुड़ी स्थापित की जाती है। यह पर्व जीवन में सकारात्मकता, नई ऊर्जा और सफलताओं का मार्ग प्रशस्त करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

ॐ संवत्सरारम्भं शुभं भवतु।

यह दिन आरोग्य, धन और समृद्धि के लिए विशेष रूप से फलदायी है। इस दिन नीम और गुड़ का सेवन शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और वर्ष भर स्वस्थ रहने का संदेश देता है।

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