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Masik Shivratri: 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि पर शिव कथा का आध्यात्मिक महत्व… पढ़िए…शिकारी और हिरण की पौराणिक कथा और सार

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Masik Shivratri: फाल्गुन मास की मासिक शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और फलदायी दिन है। इस दिन भक्तजन पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से महादेव की आराधना करते हैं, जिससे उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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Masik Shivratri: 17 मार्च 2026 को मासिक शिवरात्रि पर शिव कथा का आध्यात्मिक महत्व

Masik Shivratri व्रत कथा: शिकारी और हिरण की पौराणिक कथा का सार

फाल्गुन मास की मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व 17 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। Masik Shivratri के इस विशेष दिन पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और व्रत रखने का विधान है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन शिवरात्रि की व्रत कथा का पाठ करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। यह व्रत समस्त पापों का नाश कर पुण्यफल प्रदान करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जो व्यक्ति सच्ची निष्ठा से इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

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मासिक शिवरात्रि व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, किसी वन में एक शिकारी रहता था। उसका नाम गुरुद्रुह था। वह अपने परिवार का पालन-पोषण शिकार करके करता था। एक बार शिवरात्रि के दिन वह जंगल में शिकार की तलाश में निकला। दिनभर भटकने के बाद भी उसे कोई शिकार नहीं मिला। रात हो चली थी और वह भूख-प्यास से व्याकुल एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया, ताकि वहां से शिकार की तलाश कर सके। जिस बेल के पेड़ पर वह चढ़ा था, वह बेलपत्र का पेड़ था और उसके नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। यह बात शिकारी को ज्ञात नहीं थी।

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शिकारी ने कुछ बेलपत्र तोड़े और अनजाने में शिवलिंग पर गिरा दिए। इस प्रकार उससे अनजाने में ही शिवलिंग की पूजा हो गई। रात के प्रथम प्रहर में एक गर्भवती हिरणी पानी पीने तालाब पर आई। शिकारी उसे देखते ही अत्यंत प्रसन्न हुआ और धनुष पर बाण चढ़ाया। हिरणी ने उसे देखा और भयभीत होकर प्रार्थना की, “हे शिकारी! मैं गर्भवती हूं और शीघ्र ही प्रसव करने वाली हूं। आप मुझे मत मारो। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही वापस आ जाऊंगी, तब आप मेरा शिकार कर लेना।”

शिकारी ने उसकी बात मान ली और उसे जाने दिया। हिरणी के जाने के बाद शिकारी से कुछ और बेलपत्र टूटकर शिवलिंग पर गिर गए और अनजाने में दूसरे प्रहर की पूजा हो गई। थोड़ी देर बाद एक और हिरणी वहां आई। शिकारी ने फिर बाण साधा। दूसरी हिरणी ने भी प्रार्थना की, “हे शिकारी! मैं अभी अपने पति को ढूंढ रही हूं। उनसे मिलने के बाद मैं वापस आ जाऊंगी। तब आप मेरा शिकार कर लेना।” शिकारी ने उसे भी जाने दिया। इस बार भी अनजाने में बेलपत्र टूटे और शिवलिंग पर गिर गए, जिससे तीसरे प्रहर की पूजा हो गई।

कुछ समय बाद एक और हिरणी अपने बच्चों के साथ वहां आई। शिकारी ने उसे देखते ही प्रसन्नता से बाण उठाया। हिरणी ने उससे अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने का आग्रह किया और कहा कि वह अपने बच्चों को उनके पिता के पास छोड़कर शीघ्र ही लौट आएगी। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। इस प्रकार चौथे प्रहर की पूजा भी अनजाने में ही हो गई।

थोड़ी देर बाद वह पहली गर्भवती हिरणी अपने बच्चों के साथ और दूसरी हिरणी अपने पति के साथ वापस लौट आई। उन सभी ने शिकारी से कहा कि वे अब तैयार हैं, वह उनका शिकार कर सकता है। सभी हिरणों की सत्यता और ईमानदारी देखकर शिकारी का हृदय परिवर्तन हो गया। उसे अपने किए पर पश्चाताप हुआ। उसने धनुष-बाण छोड़ दिया और भगवान शिव से क्षमा याचना की। उस दिन अनजाने में ही उससे शिवरात्रि का व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने का पुण्य प्राप्त हो गया था। इस कथा का यह निहितार्थ है कि अनजाने में भी किए गए शिवरात्रि के व्रत से भगवान महादेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी पापों का शमन करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

मासिक शिवरात्रि पूजा विधि

  • मासिक शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • अपने घर के पूजा स्थान को शुद्ध करें या मंदिर जाएं।
  • भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें।
  • धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • शिव चालीसा और मासिक शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें।
  • आरती करें और शिव मंत्रों का जाप करें।

प्रमुख शिव मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मासिक शिवरात्रि का यह पावन व्रत भक्तों को मानसिक शांति, शारीरिक आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और भगवान शिव की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से महादेव की उपासना करते हैं, उनके सभी कष्टों का निवारण होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

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